राठ (हमीरपुर)। जनपद के राठ कस्बे में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। डूडा विभाग में तैनात रहे जूनियर इंजीनियर (जेई) और स्थानीय लेखपालों की मिलीभगत से योजना के नियमों को ताक पर रखकर रसूखदारों को आवास आवंटित करने का मामला गरमाया हुआ है।
नियमों की उड़ी धज्जियां: लुधियातपुरा का आवास सिकंदरपुरा में बना भ्रष्टाचार की हद तो तब हो गई जब लुधियातपुरा मोहल्ले के लिए स्वीकृत एक आवास का निर्माण नियमों के विरुद्ध सिकंदरपुरा गल्हिया रोड पर करा दिया गया। गंभीर बात यह है कि डूडा विभाग के जेई ने मौके पर गलत ‘जिओ टैगिंग’ कर लाभार्थी के खाते में धनराशि भी ट्रांसफर करा दी। चर्चा है कि जेई ने आवास आवंटन के नाम पर लाखों रुपये की अवैध वसूली की है और अपनी आलीशान जीवनशैली को लेकर वह पहले से ही संदेह के घेरे में है।
शिकायत के बाद लौटाए गए रिश्वत के 50 हजार: बीते माह भ्रष्टाचार का एक जीता-जागता उदाहरण तब सामने आया जब एक लाभार्थी से आवास दिलाने के नाम पर 50 हजार रुपये की रिश्वत ली गई। किस्त आने पर जब पीड़ित से पुनः वसूली की गई, तो उसने तंग आकर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। मामला बढ़ता देख चेयरमैन प्रतिनिधि शुभांकार बुधोलिया ने हस्तक्षेप किया। जांच के बाद जेई और संबंधित पक्ष को पीड़ित के 50 हजार रुपये वापस करने पड़े, जिसके बाद मामला शांत कराया गया।
लेखपालों की भूमिका पर भी सवाल: योजना में धांधली सिर्फ डूडा विभाग तक सीमित नहीं है। कस्बे में तैनात लेखपालों पर भी आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने सांठगांठ कर उन लोगों को योजना के लिए ‘पात्र’ घोषित कर दिया, जिनके पास कस्बे में पहले से ही आलीशान पक्के मकान मौजूद हैं। फिलहाल, कस्बे की गलियों में आवास योजना के नाम पर चल रही इस ‘अवैध दुकानदारी’ की जमकर चर्चा है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि पात्र गरीबों को उनका हक मिल सके और भ्रष्टाचारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।















