फतेहपुर। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह एवं जिला महामंत्री विजय त्रिपाठी के नेतृत्व में जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन प्रेषित किया गया। जिसमें इन लोगों ने मांग किया कि उत्तर प्रदेश में 29 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को सेवारत रहने एवं पदोन्नति हेतु टेट की अनिवार्यता ना की जाए। इन लोगों ने कहा कि भारत का राजपत्र संख्या 39 दिनांक 27 अगस्त 2009 के द्वारा निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 प्रभावित किया गया है। इस अधिनियम की धारा 23 के अंतर्गत अधिनियम के प्रभाव में आने की तिथि एवं उसके पश्चात नियुक्त शिक्षकों की भर्ती नियुक्त हेतु न्यूनतम अहर्ता निर्धारित की गई है।कोई व्यक्ति जिसके पास केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा प्राधिकृत किसी शिक्षा प्राधिकारी द्वारा यथा न्यूनतम अहर्ता है शिक्षक के रूप में नियुक्त के लिए पात्र होगा। जहां किसी राज्य में अध्यापक शिक्षा के पाठ्यक्रम या उसमें प्रशिक्षण प्रदान करने वाली पर्याप्त संस्थाएं नहीं है या उपधारा एक के अधीन यथा न्यूनतम अर्हता रखने वाले शिक्षक पर्याप्त संख्या में नहीं है वहां केंद्रीय सरकार यदि वह आवश्यक समझे अधिसूचना द्वारा शिक्षक के रूप में नियुक्त के लिए अपेक्षित न्यूनतम अहर्ताओं को 5 वर्ष से अनधिक की ऐसी अवधि के लिए शिथिल कर सकेगी। परंतु ऐसा कोई शिक्षक जिसके पास इस अधिनियम के प्रारंभ पर उपाधारा एक के अधीन न्यूनतम अहर्ता नहीं है 5 वर्ष की अवधि के भीतर ऐसी न्यूनतम अहर्ताएं अर्जित करेगा। शिक्षकों ने कहा कि इन लोगों ने एक शिक्षक होने के नाते जो न्यूनतम अहर्ताएं थी उसको यह लोग पूरा करके ही शिक्षक बने हैं अब टेट की जो अनिवार्यता की गई है उसे समाप्त किया जाए। इसी के बावत इन लोगों ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन प्रेषित किया और मांग किया कि टेट की अनिवार्यता को समाप्त करने के लिए सकारात्मक कदम उठाए जाएं। इस अवसर पर जितेंद्र कुमार वर्मा, शैलेंद्र सिंह भदोरिया, शशांक सिंह, विनोद कुमार श्रीवास्तव, धर्मेंद्र सिंह, लता गोस्वामी, आशिया फारुकी, प्रवीण त्रिवेदी, अनुराग मिश्रा सहित तमाम लोग मौजूद रहे।















