किरण शर्मा
वाराणसी के सारनाथ इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहाँ एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ अपनों ने ही एक बेसहारा बहन के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। पैगम्बरपुर की रहने वाली दीपा मौर्या का आरोप है कि संपत्ति के विवाद में उनके सगे भाइयों ने न केवल उन्हें बेरहमी से पीटा, बल्कि उनके कपड़े तक फाड़ दिए। और हैरानी की बात देखिए, जब पीड़िता न्याय की गुहार लेकर थाने पहुँची, तो पुलिस ने उसे गाली देकर भगा दिया l मामला सारनाथ थाना क्षेत्र के पैगम्बरपुर गांव का है। प्रार्थिनी दीपा मौर्या, जो कि अविवाहित और निराश्रित हैं, का अपने भाइयों के साथ पुश्तैनी जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। आरोप है कि 5 मार्च 2026 की रात लगभग 11 बजे, दीपा के भाई राकेश और सचिन मौर्या ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर साजिश रची और दीपा के कमरे में घुसकर हमला कर दिया।
हैवानियत की हदें: दीपा ने अपनी शिकायत में बताया है कि उन्हें बालों से घसीटकर जमीन पर गिराया गया, लात-घूंसों से पीटा गया और उनका गला दबाने की कोशिश की गई। पिटाई इतनी भयानक थी कि दीपा बेहोश हो गईं और उनके मुँह व कान से खून निकलने लगा। आरोप है कि हमलावरों ने बेइज्जत करने की नीयत से उनके कपड़े भी फाड़ दिए।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल: पीड़िता का आरोप और भी चौंकाने वाला है। दीपा का कहना है कि 112 नंबर पर सूचना देने के बाद जब वह सारनाथ थाने पहुँची, तो वहाँ मौजूद दीवान जी ने उनकी मदद करने के बजाय उन्हें गंदी गालियां दीं और डाँटकर भगा दिया। अभी तक आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
सवाल: अब सवाल यह उठता है कि क्या वाराणसी पुलिस के लिए एक असहाय महिला की सुरक्षा कोई मायने नहीं रखती? क्या वर्दी की हनक में दीवान जी कानून को भूल चुके हैं? पीड़िता दीपा मौर्या ने अब पुलिस आयुक्त से न्याय की गुहार लगाई है और मांग की है कि दोषियों पर सख्त से सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज हो।















