अहमदाबाद (गुजरात)। 15वीं शताब्दी के महान सूफी संत शेख अहमद खट्टू गंज बख्श (रहमतुल्लाह अलैह) की लगभग 500 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक दरगाह सरखेज़ रोज़ा में “इश्क़-ए-इफ्तार – विरासत इफ्तार” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह ऐतिहासिक स्थल गंगा-जमुनी तहज़ीब, सांस्कृतिक धरोहर और आपसी भाईचारे का जीवंत प्रतीक है। यह कार्यक्रम “सफर-ए-विरासत” समूह के सहयोग से अधिवक्ता गुल मोइन खोखर द्वारा आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना और समाज में एकता एवं सौहार्द को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक अमितभाई ठाकर (वेजलपुर-सरखेज), डॉ. महबूब कुरैशी (राष्ट्रीय योग समन्वयक), श्री जैनुल आबेदीन अंसारी, भाजपा राज्य अल्पसंख्यक मोर्चा महामंत्री, सदस्य – गुजरात साहित्य अकादमी, एवं रेशमा बानो काठी उपस्थित रहीं। सभी अतिथियों को स्मृति-चिह्न, ट्रॉफी एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सरखेज़ रोज़ा के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तृत चर्चा की गई तथा देश की समृद्ध संस्कृति और गंगा-जमुनी तहज़ीब पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि यह स्थल प्रेम, एकता और इंसानियत का प्रतीक है और ऐसे आयोजन समाज में सद्भाव की नई राहें खोलते हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए “सफर-ए-विरासत” टीम को उपस्थित लोगों ने हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और भविष्य में ऐसे विरासत आधारित आयोजनों के निरंतर आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की।









