* कर्पूरी ठाकुर फार्मूला लागू कर अति पिछड़ों को मिले अलग आरक्षण
* रिक्त सरकारी पदों को तत्काल भरा जाए
* मोदी सरकार अब तक की सबसे कमजोर सरकार साबित हुई
* ईको गार्डन में हुआ ध्यानाकर्षण कार्यक्रम, रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान ने मुख्यमंत्री को भेजा पत्रक
लखनऊ। कर्पूरी ठाकुर फार्मूला लागू कर पंचायत चुनाव से पूर्व अति पिछड़े वर्ग को ओबीसी आरक्षण में अलग कोटा देने, प्रदेश के सरकारी विभागों में रिक्त पड़े पदों को तत्काल भरने, प्रदेश से पूंजी पलायन पर रोक लगाने, किसानों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करने, जनगणना में आदिवासियों के धर्म कोड को लागू करने, कोल जाति को आदिवासी (एसटी) का दर्जा देने तथा माइक्रोफाइनेंस कंपनियों द्वारा महिलाओं के शोषण पर रोक लगाने की मांगों को लेकर रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान की ओर से मंगलवार को लखनऊ के ईको गार्डन में विशाल ध्यानाकर्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक पत्रक भी भेजा गया। कार्यक्रम में आयोजित सभा की अध्यक्षता ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष एस.आर. दारापुरी ने की, जबकि संचालन अभियान के संयोजक व राष्ट्रीय उदय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूराम पाल ने किया।
सभा को एआईपीएफ के संस्थापक सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंह, भारतीय मानव समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष केवट रामधनी बिंद, राष्ट्रीय किसान मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित शेखर दीक्षित, अम्बेडकर जन मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक श्रवण कुमार निराला, अति पिछड़ा अधिकार मंच के एडवोकेट रामेश्वर ठाकुर, रोजगार अधिकार अभियान के राजेश सचान, आदिवासी वनवासी महासभा के इंजीनियर रामकृष्ण बैगा और डा. बृज बिहारी सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार अब तक की सबसे कमजोर सरकार साबित हुई है। उनका आरोप था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के सामने झुकने की नीति से भारत की आर्थिक संप्रभुता पर खतरा पैदा हुआ है। सभा में वक्ताओं ने कहा कि अति पिछड़ा समाज, महिलाएं, दलित, आदिवासी और पसमांदा मुसलमान आज भी सामाजिक-आर्थिक रूप से हाशिए पर हैं और उनके अधिकारों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन वर्गों के लिए प्रतिनिधित्व और संसाधनों में भागीदारी सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है। वक्ताओं ने मांग की कि जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड का प्रावधान किया जाए और कोल आदिवासी जाति को शीघ्र ही अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिया जाए। सभा में यह भी कहा गया कि प्रदेश के बैंकों में जमा लगभग 50 प्रतिशत पूंजी का पलायन अन्य क्षेत्रों में हो रहा है। यदि इस पूंजी का उपयोग प्रदेश की महिलाओं और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में किया जाए तो इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और प्रदेश के विकास को भी गति मिलेगी।














