कानपुर देहात। कस्बा व क्षेत्र मे माहे रमजान के तीसरे जुमे की नमाज रोजेदारो ने अकीदत व एहतराम से अदा की।उलेमाओं ने कहा कि इस मुकद्दस महीने के हर लम्हे को इबादत, दुआ और नेक कामों में गुजारें।वहीं रोजेदारो ने नमाजों व कुरान ए पाक की तिलावत के साथ 16 वां रोजा भी मुकम्मल कर लिया है।शुक्रवार को कस्बा राजपुर,रमऊ,खासवरा व जल्लापुर सिकन्दरा समेत कई गांवों मे माहे रमजान का तीसरा जुमा रोजेदारो ने बड़े अदबो एहतराम के साथ अदा किया गया।कस्बे के नई जामा मस्जिद मे पेश ईमाम मौलाना अनीसुर्रहमान साहब ने रमजान की फजीलतों को बयां किया,उन्होने कहा कि यह मुकद्दस माह-ए-रमजान का दूसरा अशरा चल रहा है, जो मगफिरत का है।यह अशरा गुनाहों की माफी मांगने का है,इस अशरे में रोजेदार अल्लाह की बारगाह में झुककर अपने गुनाहों से तौबा करे और मगफिरत हासिल करने के लिए अल्लाह से दुआ करे।कहा कि रमजान अल्लाह की इबादत, तौबा और गुनाहों से माफी मांगने का सबसे बेहतरीन अवसर है। इस महीने में की गई हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है। इसलिए रोजेदारों को चाहिए कि वे अपने आमाल को बेहतर बनाएं और अल्लाह की राह में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें।उन्होंने कहा कि रमजान की रातों में तरावीह की नमाज अदा करना, कुरआन की तिलावत करना और अल्लाह से गुनाहों की माफी मांगना बहुत फजीलत का काम है। इसके साथ ही गरीबों, बेसहारा और जरूरतमंद लोगों की मदद करना, सदका और खैरात देना भी बड़ा सवाब है।इस बरकत वाले महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें, नेक कामों में हिस्सा लें और समाज में अमन, भाईचारे और मोहब्बत का पैगाम फैलाएं ताकि इस मुकद्दस महीने की बरकत से पूरी इंसानियत को फायदा मिल सके।इसके अलावा कस्बे के पुरानी जामा मस्जिद मे हाफिज नियामत उल्लाह व नूरी जामा मस्जिद मे मौलाना सैय्यद अजमत अली बरकाती ने जुमे की नमाज अदा कराई।












