अमौली, फतेहपुर। विकास खंड अमौली के नरैचा गांव में परती भूमि विकास विभाग जलागम विकास घटक द्वारा वाटर शेड महोत्सव का आयोजन किया गया। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से किसानों व आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं को जल संरक्षण, भूमि संरक्षण व पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक किया गया। दीप प्रज्जवलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। महिलाओं ने कलश यात्रा निकाल गांवों में लोगों को जल संरक्षण भूमि संरक्षण के लिए जागरूक करते हुए नारे लगाएं। मुख्य अतिथि जिला भूमि संरक्षण अधिकारी अख्तर हुसैन ने कहा कि बारिश के कारण जहां का पानी बहकर किसी एक स्थान पर जाता है वहां वाटर शेड महोत्सव मनाया जा रहा। पर्यावरण का संरक्षण करना होगा, प्राकृतिक संसाधनों को बचाना होगा। कहा कि मुख्य उद्देश्य वर्षा आधारित और बंजर भूमि में जल संचयन, सूखा-मुक्त भारत का निर्माण और ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करना। कार्यक्रम की अध्यक्षता रमाकांत तिवारी ने व सफल संचालन आलोक गौड़ ने किया। कृषि वैज्ञानिक डा. शिवमंगल सिंह ने फसल कटाई के बाद खेतों की मेड या घावा को खुला न छोड़ने को प्रेरित किया। कहा कि पहली बारिश से नाइट्रोजन मिल जाता है लेकिन किसान फसल करने के बाद मेड खुली छोड़ देते है जिससे इसका लाभ नहीं मिलता। भूमि परीक्षण प्रयोगशाला प्रभारी प्रेमदान पाल में मिट्टी की जांच को लेकर किसानों को प्रेरित किया। नाडेप कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट बनाने की विधि बताई। कृषि विभाग के सलाहकार कुंवर सेन गंगवार ने विभाग की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। जल संरक्षण पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन कंपोजिट विद्यालय नरैचा में किया गया जिसमे आकाक्षा, शिवानी, रिया को क्रमशः प्रथम, द्वितीय, तृतीय आने पर मोमेंटो प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। तालाब बनाकर, खेती कर जल संरक्षण के रूप में कार्य करने वाले वाटरशेड मार्गदर्शक के तौर पर दस किसानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वृक्षारोपण, सफाई अभियान व भूमि पूजन के कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। जेई पीयूष कुमार, आशुतोष सिंह, राजेंद्र उत्तम, लखन सिंह, अनंत यादव, सुनील पटेल सहित शिवपुरी, हुसेपुर, जरौली, नयापुरवा, जुड़ाखेड़ा, उदुपुर व बोधी का डेरा, मेडे का पुरवा के किसान उपस्थित रहे।















