वाराणसी। गोंड अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्र न तो निर्गठ किया जा रहा है एवं पूर्व में निर्गत प्रमाण पत्रों को किसी भी व्यक्ति द्वारा आपत्ती पर बिना किसी कारण निरस्त भी किया जा रहा जनपद में गोंड अनुसूचित जनजाति समाज के साथ अन्याय किया जा रहा है। स्पष्ट शासनादेश जारी होने के बाद भी गोड जाति समाज के लोगों के जाति प्रमाण पत्र न तो नए निर्गत किए जा रहे हैं एवं पूर्व में निर्गत जारी प्रमाण पत्रों को जो कि सम्बन्धित विभागों/तहसील द्वारा जांच परख के बाद जारी प्रमाण पत्रों को भी निरस्त किया जा रहा है, जिससे गोंड समाज में मारी निराशा व आक्रोश व्याप्त है। तहसील स्तर पर भी सम्बन्धित अधिकारियों द्वारा मौखिक यह कहा जा रहा है कि गोंड समाज के जाति प्रमाण पत्र जारी करने पर रोक लगा दी गई.
गौड नमाज के अनेक लोगों को जाति प्रमाण पत्र न होने के कारण शिक्षा, रोजगार एवं सरकारी योजना का लाभपाम करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह न केवल उनके संवैधानिक अधिकारों का उत्सव है, बल्कि सामाजिक न्याय की भावना के भी विपरीत है। न बनने की स्थिति में धरना प्रदर्शन करने पर उच्च अधिकारी द्वारा दबाव में तहसील के अधिकारी कुछ दिन अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत करते हैं तत्पश्चात सम्बन्धित विभागों अधिकारियों द्वारा हिलावली करने लगते है यह अक्सर होता रहता जिससे बर्तमान सरकार के प्रति थोड जातियों के अन्दर खिलाफ द्वेष पैदा कराते है। गोंड आदिवासी देश का मूल निवासी है। बर्तमान सरकार आदिवासियों को उत्थान के लिए अनेक प्रयास कर रहे हैं लेकिन वहसील स्वर के प्रशासन द्वारा जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने में हिसावली करते हैं जिससे केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे।
प्रशासन से यह मांग की जाती है कि गोंड समाज के जाति प्रमाण पत्र तत्कान प्रभाव से जारी किए जाएं। बिना कारण निरस्त किए गए प्रमाण पत्रों को पुनः बहाल किया जाए। दोषी अधिकारियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए। यति शीघ्र ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो गोंड समाज व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।















