जहानाबाद । रमज़ान माह के अन्तिम पखवारे मे इस्लामी पवित्र ग्रंथ कुरान का अवतरण भी हुआ था । इसलिए इस माह की और भी फज़ीलत है। कुरान का शाब्दिक अर्थ पढ़ा जाने वाला ग्रंथ है । इस्लाम की परिभाषा में कुरान उस ईश ग्रन्थ को कहते हैं । जो ईश ग्रंथों की दीर्घकालीन श्रंखला की अंतिम कड़ी के रूप में अवतरित हुआ। यह ग्रंथ संपूर्ण मानव जाति के पथ प्रदर्शन के लिए है। संसार का हर व्यक्ति अरबी भाषा में निपुण नहीं हो सकता इसलिए विद्वानों और अरबी भाषा के ज्ञानियों ने कुरान का अनुवाद किया भारत की प्रमुख भाषाओं हिन्दी ,मराठी, तमिल, तेलुगू ,अंग्रेजी, उर्दू सहित आदि भाषाओं में पवित्र ग्रंथ कुरान उपलब्ध है । इस्लामी स्तंभों में नमाज़ के दौरान कुरान के अंश अर्थात सूरे पढ़े जाते हैं। कुरान में जीव विज्ञान वनस्पति विज्ञान प्रजनन शरीर संरचना पर्यावरण भूगोल इतिहास समाजशास्त्र मानव विज्ञान सृष्टि रचना आदि विषयों पर काफी चर्चा हुई है। यह चर्चा हमारी विषय बद्व पुस्तकों की तरह एकत्र नहीं बल्कि पूरे कुरान में जगह-जगह बिखरी हुई है तथा बार-बार उल्लिखित हुई है । कुरान को पढ़ना, समझना तथा उस पर अमल करना इंसानी जीवन में चार चांद लगा सकता है। लेकिन सिर्फ पढ़ लेना और अमल न करना बे मकसद भी साबित हो सकता है । पूरे कुरान में अहंकार ना करना ,गरीबों की मदद करना, वतन से मोहब्बत, भाईचारा कायम रखना, मां ,बहनों ,बेटियों, की इज्ज़त आबरू का ख्याल रखना भले ही वह किसी की हो, अमन कायम करना, दहशतगर्दी का विरोध करना, एक ही ईश्वर की उपासना करना आदि पर ज़ोर दिया गया है । उपरोक्त जानकारी देते हुए मौलाना सैय्यद साकिब रज़ा नक़वी ने बताया कि ऐसा मानना है कि माहे रमज़ान के अंतिम पखवारे की क्रमशः 19, 21 ,23 ,25,27 व 29 की रातों को जिन्हें शबे कद्र की रातों के नाम से जाना जाता है। इन्हीं रातों मे किसी एक रात को क़ुरान का अवतरण हुआ था । इसीलिए इन रातों को इस्लाम धर्म के मानने वाले रात भर इबादत कर ईश्वर की बारगाह में अपने पापों से मुक्ति पाने तथा मुल्क की सलामती हेतु दुआएं करते हैं।








