- बुंदेलखंड के गांव बने सप्लाई हब
हमीरपुर- जनपद में गैस संकट गहराने के साथ ही अब गांवों के गोबर के उपलों की मांग तेजी से बढ़ गई है। हालत यह है कि कानपुर समेत आसपास के शहरों के व्यापारी जनपद के गांव-गांव घूमकर उपले खरीद रहे हैं और उन्हें शहरों में ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। बीते एक महीने में करीब 100 लोडर उपले कानपुर भेजे जा चुके हैं। कानपुर से खरीदारी करने आए अरशद खान और मनीष कुमार ने बताया कि शहर में गैस की किल्लत के चलते उपलों की मांग अचानक बढ़ गई है। स्थानीय गांवों में उपले पर्याप्त नहीं मिल पा रहे, इसलिए बुंदेलखंड के हमीरपुर, बांदा, जालौन और महोबा जैसे जिलों से बड़े पैमाने पर खरीद की जा रही है। व्यापारियों के मुताबिक, बुंदेलखंड के उपले बड़े और भारी होते हैं, जो देर तक जलते हैं, जबकि अन्य जिलों के उपले छोटे और जल्दी राख हो जाते हैं। यही वजह है कि यहां के उपलों की मांग ज्यादा है। अब तक करीब 50 चक्कर लगाकर लोडर से उपले शहर पहुंचाए जा चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां एक सैकड़ा उपले 200 रुपये में मिल रहे हैं, वहीं शहरों में यही 400 से 500 रुपये प्रति सैकड़ा बिक रहे हैं। इनका उपयोग घरों में खाना बनाने के अलावा फैक्ट्रियों और ईंट भट्टों में भी हो रहा है। व्यापारी रनियां, भौंती और पनकी जैसे इलाकों में इनकी सप्लाई कर रहे हैं और कई जगह स्टॉक भी जमा किया जा रहा है, ताकि बरसात में ऊंचे दाम मिल सकें। उपलों की बढ़ती मांग से पशुपालकों की आमदनी में इजाफा हुआ है। रामदेवी, कौशिल्या यादव, रन्नो देवी, धीरेंद्र कुमार और भूपेंद्र यादव जैसे पशुपालकों का कहना है कि पहले उपलों का उपयोग केवल घर तक सीमित था, लेकिन अब बिक्री बढ़ने से अतिरिक्त आय का जरिया बन गया है, जिससे घर-गृहस्थी चलाने में मदद मिल रही है।















