*बिजली कर्मियों का निजीकरण और उत्पीड़न के खिलाफ विरोध तेज, दी आंदोलन की चेतावनी*
संवाददाता- जाकिर अली
गोरखपुर। लखनऊ/उत्तर प्रदेश, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि शीर्ष प्रबंधन की विफलताओं के कारण प्रदेश की बिजली व्यवस्था गर्मियों की शुरुआत में ही डगमगाने लगी है। निजीकरण और कर्मचारियों के उत्पीड़न के विरोध में समिति का आंदोलन लगातार जारी है, जिसके तहत आज बागपत और गाजियाबाद में विरोध सभाएं आयोजित की गईं।
अव्यवस्था के मुख्य कारण: संघर्ष समिति के पदाधिकारियों—जितेन्द्र सिंह गुर्जर, मोहम्मद वसीम और निखिल कुमार ने बताया कि अनुभवी संविदा कर्मियों की छंटनी और नियमित कर्मचारियों के अनियोजित तबादलों से तकनीकी कार्यों पर बुरा असर पड़ा है। आउटसोर्सिंग कंपनियों के अनुभवहीन कर्मियों के भरोसे सिस्टम को छोड़ दिया गया है, जिससे ट्रांसफॉर्मर और सब-स्टेशन का लोड संभालना मुश्किल हो रहा है।
उपभोक्ता हो रहे परेशान: समिति ने स्पष्ट किया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था में भारी खामियां हैं। भुगतान के बाद भी कनेक्शन न जुड़ना और गलत बिलिंग जैसी समस्याओं से जनता त्रस्त है। वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग में कार्यों के गलत आवंटन ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है।
आंदोलन की चेतावनी: संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि 19 मार्च 2023 को ऊर्जा मंत्री के निर्देशों के बावजूद कर्मचारियों के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां बंद नहीं हुईं। समिति ने चेतावनी दी है कि जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं होता और उत्पीड़न खत्म नहीं होता, तब तक यह आंदोलन और तेज किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि कर्मचारी किसानों और आम जनता की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देते रहेंगे।















