फतेहपुर। महिला आरक्षण बिल को लेकर फतेहपुर सांसद के कानपुर स्थित आवास में प्रदर्शन की निंदा करते हुए ओमप्रकाश गिहार, मिस्बाहुल हक़ व संदीप साहू एडवोकेट ने कहा की बिल तो पहले ही पास हो चुका है उसे लागू करना चाहिए, लागू न कर स्वयं कटघरे में खड़ी सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए। अखिल भारतीय गिहार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश गिहार ने महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पास न होने पर फतेहपुर सांसद नरेश उत्तम पटेल के कानपुर स्थित आवास पर भारतीय जनता पार्टी की महिलाओं द्वारा प्रदर्शन कर नारा लगाने और घर में अकेली महिला यानी सांसद की पत्नी को अपशब्द बोले जाने की कड़े शब्दों में निंदा की। कहा कि महिला हितों की बात करने वाले लोग बिलकीस बानो, हाथरस, जैसी घटनाओं को नज़र अंदाज़ कर वेतनभोगी संविदा कर्मचारी महिलाओं व बलात्कार के मामले को लेकर कोई आन्दोलन नहीं होता। साथ रहे अल्पसंख्यक कांग्रेस विभाग के निवर्तमान प्रदेश उपाध्यक्ष मिस्बाहुल हक ने कहा कि आखिर संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण बिल पास हो कर भी लागू क्यों नहीं किया गया। उसे 2029 के लिए क्यों विलंबित कर दिया गया, फिर 3 दिन का विशेष संसद सत्र आयोजित कर परिसीमन बिल बिना विपक्ष की सहमति से लाया गया। 2011 की जनसंख्या पर महिला आरक्षण बिल जब वर्तमान समय में लोकसभा की संसद सदस्य संख्या में पास हुआ तो उनमें से तीन महीने पहले पास बिल का नोटिफिकेशन 16 अप्रैल को क्यों किया गया इस पर बीजेपी का रहस्य खामोश क्यों है। 2026 की जनसंख्या गणना प्रक्रिया शुरू है, जनसंख्या वृद्धि के नये आंकड़े से लिंगानुपात में बदलाव मिलेगा, जन गणना में स्वाभाविक रूप से नये सामाजिक सरोकार से जुड़े हुए पैरामीटर पर आंकड़े भी हासिल होंगे। देश के विभिन्न राज्यों के सामाजिक सांस्कृतिक आर्थिक राजनीतिक बुनियाद पर आधारित तस्वीरें आयेंगी, उसके बाद कम या बढ़ी औसत महिला मतदाता प्रतिशत से लोकसभा व विधानसभा का परिसीमन महिला आरक्षण का सुनिश्चित करना प्रासंगिक होता।केन्द्र सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित आनुपातिक प्रतिनिधित्व के अनुसार नयी जनसंख्या प्रक्रिया की समाप्ति पर मिले आंकड़े से परिसीमन करने और लोकसभा-विधानसभा क्षेत्र संख्या में वृद्धि करना चाहिए।जनसंख्या प्रक्रिया में ओबीसी को शामिल नहीं करना भी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता के लिए भागीदारी के निर्णय का प्रश्न का उत्तर अभी भी साफ़ नहीं है, इसलिए ओबीसी महिला आरक्षण में भी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हैं जो वह देना नही चाहती !
डोमा प्रदेश सचिव संदीप साहू एडवोकेट ने कहा कि परिसीमन करने का उदाहरण देश ने जम्मू कश्मीर और असम में जिस तरह किया गया है उससे सामाजिक सांस्कृतिक और स्वतंत्रता बंधुत्व की विचारधारा को चोट लगी है वैसा ही बदलाव महिला आरक्षण बिल के नाम पर परिसीमन करने वाला बिल पास कराने का प्रयास किया गया लेकिन देश ने संविधान में सामूहिक सह अस्तित्व की विचारधारा पर राजनीतिक दल के साथ अन्तर आत्मा पर जो मिसाल दी है वह स्वागत योग्य कदम है कि संशोधन बिल पास नहीं हुआ। मोदी सरकार को इस्तीफा देना चाहिए।















