वाशिंगटन। अमेरिका के 2026 मिडटर्म चुनावों के शुरुआती नतीजों ने अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती भागीदारी को एक बार फिर सामने ला दिया है। चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों ने प्रतिनिधि सभा से लेकर राज्य स्तरीय महत्वपूर्ण पदों तक जीत दर्ज की है। कई मौजूदा सांसदों ने अपनी सीटें बरकरार रखीं, जबकि कुछ नए चेहरों ने पहली बार अमेरिकी कांग्रेस में जगह बनाई। इस चुनाव में भारतीय मूल की उम्मीदवार पिया दांडिया ने फ्लोरिडा से जीत हासिल कर प्रतिनिधि सभा में अपनी जगह बनाई। वहीं सुहास सुब्रमण्यम, अमी बेरा, रो खन्ना और प्रमिला जयपाल ने भी अपनी-अपनी सीटों पर जीत दर्ज की। इन नतीजों के बीच मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने भी अपना पद बरकरार रखा है। दूसरी तरफ रिपब्लिकन पार्टी के भारतीय मूल के नेता विवेक रामास्वामी को ओहायो के गवर्नर चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इस तरह चुनाव में भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों का प्रदर्शन अलग-अलग रहा, लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े कई प्रमुख चेहरों की जीत ने अमेरिकी राजनीति में इस समुदाय की मौजूदगी को और मजबूत किया है।
पिया दांडिया ने पहली बार अमेरिकी कांग्रेस में बनाई जगह
इस चुनाव में पिया दांडिया की जीत को भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। उन्होंने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को हराया। पिया दांडिया को करीब 51.9 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को लगभग 48.1 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। पिया दांडिया फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में जन्मी और पली-बढ़ी हैं। राजनीति में आने से पहले वह शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी रही हैं और हाईस्कूल में प्रिंसिपल के रूप में भी काम कर चुकी हैं। उनकी जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने ऐसे चुनावी क्षेत्र में सफलता हासिल की, जहां रिपब्लिकन पार्टी को मजबूत समर्थन मिलने की उम्मीद थी। उनकी जीत के साथ भारतीय मूल के लोगों की अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में मौजूदगी को एक नया चेहरा मिला है। अब वह कांग्रेस में फ्लोरिडा के 22वें जिले का प्रतिनिधित्व करेंगी।
अमी बेरा ने आठवीं बार दर्ज की जीत
भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद अमी बेरा ने कैलिफोर्निया के तीसरे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल कर आठवीं बार प्रतिनिधि सभा में पहुंचने का रास्ता साफ किया है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब टकर को हराया। अमी बेरा अमेरिकी कांग्रेस में सबसे लंबे समय से सेवा दे रहे भारतीय-अमेरिकी नेताओं में शामिल हैं। पेशे से चिकित्सक रहे बेरा ने वर्ष 2012 में पहली बार चुनाव जीतकर अमेरिकी राजनीति में अपनी जगह बनाई थी। वह स्वास्थ्य सेवाओं और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। कैलिफोर्निया से उनकी लगातार जीत यह दिखाती है कि भारतीय मूल के नेताओं ने अमेरिकी राजनीति में लंबे समय से अपनी मजबूत राजनीतिक जमीन तैयार की है। आठवीं बार जीत के साथ उनका संसदीय अनुभव और बढ़ने जा रहा है।
रो खन्ना और प्रमिला जयपाल ने भी बरकरार रखी सीट
कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार रो खन्ना ने भी जीत दर्ज की है। वह सिलिकॉन वैली क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह उनका छठा कार्यकाल होगा। रो खन्ना अमेरिकी राजनीति में तकनीक, अर्थव्यवस्था, रोजगार और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर अपनी सक्रियता के लिए जाने जाते हैं। वहीं वॉशिंगटन राज्य के सातवें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से प्रमिला जयपाल ने छठी बार जीत हासिल की। वह वर्ष 2016 में पहली बार प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी गई थीं। इसके बाद से वह लगातार अपनी सीट बरकरार रखती आई हैं। प्रमिला जयपाल अमेरिकी संसद में आव्रजन सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक नीतियों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रही हैं। उनकी जीत से प्रतिनिधि सभा में भारतीय मूल की एक अनुभवी महिला सांसद की मौजूदगी बनी रहेगी।
सुहास सुब्रमण्यम को दूसरी बार मिली सफलता
वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार सुहास सुब्रमण्यम ने रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को हराकर दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्हें 61 प्रतिशत से अधिक वोट मिलने की खबर है। सुहास वर्ष 2024 में वर्जीनिया से अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी बने थे। सुहास सुब्रमण्यम का जन्म अमेरिका के ह्यूस्टन में भारतीय माता-पिता के घर हुआ था। वह पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार के रूप में भी काम कर चुके हैं। उनकी दोबारा जीत से प्रतिनिधि सभा में भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक सांसदों की संख्या और उनकी राजनीतिक भागीदारी बनी रहेगी।
अरुणा मिलर ने मैरीलैंड में बरकरार रखा पद
भारतीय मूल की अरुणा मिलर ने मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में अपना कार्यकाल बरकरार रखा है। वह डेमोक्रेटिक गवर्नर वेस मूर के साथ चुनाव मैदान में थीं। इस जोड़ी ने रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब क्रॉप और उनके सहयोगी डैन कॉक्स को हराया। अरुणा मिलर की जीत राज्य की कार्यकारी व्यवस्था में भारतीय मूल के लोगों की निरंतर मौजूदगी को दर्शाती है। लेफ्टिनेंट गवर्नर का पद राज्य सरकार में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पद पर रहते हुए उन्हें प्रशासनिक और नीतिगत मामलों में गवर्नर के साथ काम करने का अवसर मिलता है।
जोश कौल को विस्कॉन्सिन में मिली जीत
भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक नेता जोश कौल ने विस्कॉन्सिन के अटॉर्नी जनरल पद के चुनाव में जीत दर्ज की है। अटॉर्नी जनरल राज्य का प्रमुख कानूनी अधिकारी होता है। उसकी जिम्मेदारी राज्य के कानूनी हितों की रक्षा करना और कानून से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों को देखना होती है। इसके अलावा अपर्णा राज ने वॉशिंगटन डीसी काउंसिल के वार्ड-1 से जीत हासिल की। वहीं जॉर्जिया राज्य की विधानसभा के डिस्ट्रिक्ट-97 से ज्योत सिंह ने भी चुनाव में सफलता प्राप्त की। इन जीतों से पता चलता है कि भारतीय मूल के उम्मीदवार केवल राष्ट्रीय संसद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्थानीय और राज्य स्तरीय राजनीति में भी अपनी जगह बना रहे हैं।
विवेक रामास्वामी को ओहायो में मिली हार
चुनाव में भारतीय मूल के सभी उम्मीदवारों को सफलता नहीं मिली। रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख नेता विवेक रामास्वामी को ओहायो के गवर्नर चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन के हाथों हार का सामना करना पड़ा। विवेक रामास्वामी को राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का समर्थन प्राप्त था। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी की ओर से गवर्नर पद के लिए चुनाव लड़ा था। हालांकि, एमी एक्टन ने उन्हें शिकस्त देकर जीत हासिल की। इस परिणाम को ओहायो की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इसी तरह रिपब्लिकन उम्मीदवार महेश गणोरकर को नॉर्थ कैरोलिना के चौथे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में हार मिली। वह डेमोक्रेटिक उम्मीदवार और मौजूदा सांसद वैलेरी फूशी के खिलाफ मैदान में थे। न्यूयॉर्क के अटॉर्नी जनरल पद के चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार सरिता कोमातिरेड्डी को भी जीत नहीं मिली।
कई भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों के परिणाम का इंतजार
चुनाव के शुरुआती नतीजों के दौरान कुछ भारतीय मूल के उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होना बाकी था। इनमें कैलिफोर्निया के सांसद अमी शाह, लॉस एंजिलिस के मेयर चुनाव में नित्या रमन और टेक्सास में चुनाव लड़ रहीं पूजा सेठी शामिल थीं। इसके अलावा टेक्सास के 66वें हाउस डिस्ट्रिक्ट से संदीप श्रीवास्तव और कुछ अन्य उम्मीदवारों के परिणाम भी शुरुआती रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं हुए थे। ऐसे में भारतीय मूल के उम्मीदवारों की कुल जीत और हार का अंतिम आंकड़ा मतगणना पूरी होने तथा आधिकारिक परिणाम घोषित होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
अमेरिका में भारतीय समुदाय की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी
अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की आबादी पांच मिलियन से अधिक मानी जाती है। शिक्षा, चिकित्सा, तकनीक, कारोबार और पेशेवर सेवाओं के साथ-साथ अब राजनीति में भी इस समुदाय की भागीदारी लगातार दिखाई दे रही है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय मूल के कई नेताओं ने स्थानीय प्रशासन से लेकर अमेरिकी कांग्रेस तक अपनी पहचान बनाई है। इस चुनाव में भी भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों ने अलग-अलग राज्यों में चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई। खास बात यह है कि उनकी भागीदारी केवल डेमोक्रेटिक पार्टी तक सीमित नहीं रही। रिपब्लिकन पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में भी भारतीय मूल के लोगों ने चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमाई।
मिडटर्म चुनाव से अमेरिकी राजनीति में नए संकेत
2026 के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में बहुमत हासिल किया है। इससे राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सामने नई संसदीय चुनौती खड़ी हो गई है। इसी राजनीतिक बदलाव के बीच भारतीय मूल के कई डेमोक्रेटिक नेताओं की जीत ने भी ध्यान आकर्षित किया है। इन चुनावों के नतीजे बताते हैं कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय अब अमेरिकी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में केवल मतदाता के रूप में ही नहीं, बल्कि उम्मीदवार और निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। कुल मिलाकर, 2026 के मिडटर्म चुनाव भारतीय मूल के अमेरिकी नेताओं के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं। अमी बेरा, रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और सुहास सुब्रमण्यम जैसे अनुभवी सांसदों ने अपनी सीटें बरकरार रखीं, जबकि पिया दांडिया ने पहली बार कांग्रेस में प्रवेश किया। अरुणा मिलर और जोश कौल की जीत ने राज्य स्तरीय राजनीति में भी भारतीय मूल के नेताओं की मौजूदगी को मजबूत किया है। आने वाले वर्षों में अमेरिकी राजनीति में इस समुदाय की भूमिका किस तरह आगे बढ़ती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।












