वाशिंगटन। अमेरिका और इजरायल की राजनीति में हालिया चुनावी नतीजों ने सत्ता के समीकरण बदल दिए हैं। अमेरिका के मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी को मिली बड़ी जीत के बाद राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का कांग्रेस पर नियंत्रण खत्म हो गया है। प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में डेमोक्रेट्स के बहुमत ने ट्रंप प्रशासन के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। अब राष्ट्रपति को अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए विपक्ष के मजबूत संसदीय नियंत्रण का सामना करना पड़ेगा। दूसरी ओर इजरायल में 27 अक्टूबर को हुए चुनावों के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी संसद में बहुमत हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दोनों देशों में चुनावी नतीजों ने सरकारों की राजनीतिक स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अमेरिका में डेमोक्रेट्स की जीत को ट्रंप प्रशासन की नीतियों के खिलाफ मतदाताओं के रुख के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं इजरायल में नेतन्याहू के सामने बहुमत जुटाने की चुनौती यह संकेत दे रही है कि वहां भी राजनीतिक स्थिरता का रास्ता आसान नहीं है। हालांकि, दोनों देशों की राजनीतिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन चुनावों के बाद सरकारों के सामने पैदा हुई चुनौतियां अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
अमेरिका में ट्रंप के लिए बढ़ी राजनीतिक मुश्किलें
अमेरिका के मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित किया है। चुनाव से पहले ट्रंप ने मतदाताओं से अपील की थी कि वे इन चुनावों को उनके राष्ट्रपति कार्यकाल पर जनमत संग्रह के रूप में देखें। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करते हुए अपने प्रशासन के कामकाज को चुनाव का प्रमुख मुद्दा बनाया था। हालांकि, नतीजे इसके विपरीत रहे। डेमोक्रेट्स ने दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया। इससे रिपब्लिकन पार्टी की संसदीय ताकत कमजोर हो गई है। अमेरिकी व्यवस्था में कांग्रेस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। संसद के दोनों सदन कानून बनाने, सरकारी बजट को मंजूरी देने और राष्ट्रपति प्रशासन की जवाबदेही तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। अब डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण वाली कांग्रेस ट्रंप प्रशासन के कई फैसलों पर सवाल उठा सकती है। सरकार की नीतियों, खर्च और प्रशासनिक कामकाज की जांच के लिए संसदीय समितियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे ट्रंप के लिए अपनी योजनाओं को बिना किसी बड़ी राजनीतिक बाधा के लागू करना मुश्किल हो सकता है।
कांग्रेस में विपक्ष की मजबूत स्थिति
अमेरिका की प्रतिनिधि सभा और सीनेट में डेमोक्रेट्स का बहुमत ट्रंप प्रशासन के लिए कई स्तरों पर चुनौती पैदा कर सकता है। किसी भी महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराने के लिए राष्ट्रपति को सांसदों का समर्थन जुटाना होगा। वहीं विपक्षी पार्टी सरकारी खर्च और प्रशासनिक फैसलों को लेकर कड़ा रुख अपना सकती है। कांग्रेस में डेमोक्रेट्स की मजबूत स्थिति का असर ट्रंप की घरेलू नीतियों पर भी पड़ सकता है। अर्थव्यवस्था, व्यापार, आव्रजन और सरकारी खर्च जैसे मुद्दों पर दोनों पार्टियों के बीच टकराव बढ़ने की संभावना है। ट्रंप प्रशासन की ओर से पेश किए जाने वाले प्रस्तावों को डेमोक्रेटिक सांसदों की सहमति के बिना आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा। इसके अलावा कांग्रेस की निगरानी समितियां प्रशासन के विभिन्न विभागों से जवाब मांग सकती हैं। इससे ट्रंप सरकार पर राजनीतिक और संस्थागत दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, राष्ट्रपति के पास अपने संवैधानिक अधिकार बने रहेंगे और वह कई मामलों में कार्यकारी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकेंगे।
इजरायल में नेतन्याहू के सामने बहुमत की चुनौती
अमेरिका के साथ-साथ इजरायल की राजनीति में भी चुनावी नतीजों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 27 अक्टूबर को हुए चुनावों के बाद नेतन्याहू संसद में बहुमत हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सदस्य होते हैं। सरकार बनाने और उसे स्थिर बनाए रखने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। इजरायल की राजनीतिक व्यवस्था में गठबंधन सरकारों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। किसी एक पार्टी के लिए अकेले बहुमत हासिल करना आसान नहीं होता। ऐसे में सरकार बनाने के लिए अलग-अलग दलों के बीच समझौता करना पड़ता है। नेतन्याहू के सामने भी यही चुनौती है कि वह पर्याप्त सांसदों का समर्थन जुटाकर अपनी सरकार को मजबूत आधार दे सकें। बहुमत के लिए जरूरी समर्थन नहीं मिलने की स्थिति में सरकार के कामकाज पर असर पड़ सकता है। गठबंधन में शामिल दल अपनी शर्तों और राजनीतिक मांगों के आधार पर सरकार को समर्थन देते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री को सहयोगी दलों के साथ संतुलन बनाकर चलना पड़ता है।
गठबंधन की राजनीति बनी नेतन्याहू की परीक्षा
इजरायल में गठबंधन की राजनीति लंबे समय से सरकारों के गठन और स्थिरता को प्रभावित करती रही है। अलग-अलग विचारधारा वाले दलों को एक साथ लेकर चलना प्रधानमंत्री के लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा होती है। नेतन्याहू को भी अपने समर्थक दलों और संभावित सहयोगियों के बीच सहमति बनाने की जरूरत है। संसद में बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के लिए राजनीतिक दलों के साथ बातचीत और समझौते महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि नेतन्याहू पर्याप्त समर्थन जुटाने में सफल नहीं होते हैं तो उनकी सरकार की स्थिति कमजोर हो सकती है। इससे देश में राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने की आशंका भी पैदा हो सकती है। इजरायल की आंतरिक राजनीति पर सुरक्षा, क्षेत्रीय संघर्ष और आर्थिक परिस्थितियों का भी प्रभाव पड़ता है। ऐसे में नई सरकार के सामने केवल संसद में बहुमत जुटाने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि देश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी राजनीतिक सहमति बनानी होगी।
दोनों देशों की राजनीति पर दुनिया की नजर
अमेरिका और इजरायल दोनों अंतरराष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में वहां चुनावों के बाद पैदा हुए राजनीतिक बदलावों पर दुनिया की नजर बनी हुई है। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन को अब ऐसी कांग्रेस का सामना करना होगा, जहां विपक्ष का नियंत्रण है। इससे घरेलू नीतियों के साथ-साथ विदेश नीति से जुड़े फैसलों पर भी राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। इजरायल में नेतन्याहू के लिए बहुमत जुटाना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकार की स्थिरता का सीधा संबंध देश के राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों से जुड़ा होता है। संसद में मजबूत समर्थन मिलने पर प्रधानमंत्री को नीतियों को लागू करने में आसानी होती है, जबकि बहुमत का संकट सरकार की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। दोनों देशों के चुनावी घटनाक्रम यह दिखाते हैं कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाताओं का फैसला सरकारों की राजनीतिक ताकत को बदल सकता है। अमेरिका में डेमोक्रेट्स की जीत ने ट्रंप के लिए संसद में नई चुनौती खड़ी कर दी है, जबकि इजरायल में नेतन्याहू को अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए बहुमत जुटाना होगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रंप विपक्ष के नियंत्रण वाली कांग्रेस के साथ किस तरह काम करते हैं और नेतन्याहू संसद में जरूरी समर्थन हासिल करने के लिए क्या राजनीतिक रणनीति अपनाते हैं। दोनों देशों के ये घटनाक्रम न केवल उनकी घरेलू राजनीति, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।















