नई दिल्ली। दिवाली से पहले भारत के लिए ईरान से राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने पर लगाई गई पाबंदियों से छूट दे दी है। इस फैसले से इन देशों के समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को राहत मिलने की उम्मीद है। तेहरान ने इस व्यवस्था को आपसी हितों से जुड़ा कदम बताया है। इसके तहत भारत से दवाओं का आयात और चीन की ओर से मिलने वाला राजनीतिक समर्थन भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे में इस समुद्री रास्ते पर किसी भी तरह की पाबंदी का असर केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा जरूरतों पर पड़ता है। भारत जैसे देश के लिए यह मार्ग विशेष महत्व रखता है, क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा होता है। ईरान के इस फैसले को भारत के लिए कूटनीतिक और व्यापारिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पश्चिम एशिया की परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य और क्यों है महत्वपूर्ण?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला संकरा समुद्री मार्ग है। इसके एक तरफ ईरान है, जबकि दूसरी ओर ओमान और संयुक्त अरब अमीरात का क्षेत्र पड़ता है। भौगोलिक स्थिति के कारण यह मार्ग खाड़ी देशों से दुनिया के अन्य हिस्सों तक तेल और गैस पहुंचाने का प्रमुख रास्ता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे देशों से निकलने वाले ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति के लिए इस मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है। दुनिया के कई बड़े ऊर्जा आयातक देश इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर हैं। इसलिए यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। भारत के लिए इस मार्ग का महत्व इसलिए अधिक है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है। यदि होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो तेल की आपूर्ति, परिवहन लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है।
भारत को क्यों मिली छूट?
ईरान की ओर से भारत को दी गई छूट के पीछे आपसी हितों को प्रमुख आधार बताया गया है। तेहरान का कहना है कि भारत से दवाओं का आयात उसके लिए महत्वपूर्ण है। दवाएं किसी भी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा होती हैं और इनके आयात में बाधा आने से आम लोगों को परेशानी हो सकती है। भारत दवा उत्पादन के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है। भारतीय दवा उद्योग कई देशों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराता है। ऐसे में ईरान के लिए भारत से दवाओं की आपूर्ति बनाए रखना महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा भारत और ईरान के बीच लंबे समय से व्यापारिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, परिवहन और क्षेत्रीय संपर्क जैसे मुद्दों पर सहयोग की संभावनाएं भी बनी रही हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और बदलते भू-राजनीतिक हालात के कारण इन संबंधों में कई बार चुनौतियां भी सामने आई हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर दूसरे देशों से कच्चा तेल और गैस आयात करता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिलने का सीधा संबंध देश की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों से है। इस मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा से तेल, गैस और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। भारत के लिए यह समुद्री रास्ता केवल कच्चे तेल के आयात तक सीमित नहीं है। देश को मिलने वाली एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। खाड़ी क्षेत्र से आने वाली गैस और पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसके अलावा उर्वरक और अन्य औद्योगिक वस्तुओं के व्यापार के लिए भी यह रास्ता महत्वपूर्ण है। मौजूदा परिस्थितियों में भारतीय जहाजों को छूट मिलने से समुद्री परिवहन को लेकर बनी अनिश्चितता कुछ कम हो सकती है। इससे भारतीय व्यापारिक जहाजों को अपनी आवाजाही जारी रखने में मदद मिलेगी। हालांकि, वास्तविक राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि छूट की शर्तें क्या हैं और समुद्री मार्ग पर सुरक्षा की स्थिति कितनी बेहतर होती है।
भारतीय जहाजों से लिया जा सकता है ट्रांजिट शुल्क
ईरानी सांसद आमिर हयात-मोगद्दम के बयान में एक महत्वपूर्ण बात यह भी सामने आई है कि भारत और चीन के जहाजों को रास्ते से गुजरने की अनुमति मिलने के बावजूद उनसे ट्रांजिट शुल्क लिया जा रहा है। यानी इन देशों के जहाजों को प्रतिबंधों से छूट तो दी गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें पूरी तरह मुफ्त में समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करने की सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि कतर के जहाजों को बिना किसी शुल्क के गुजरने की अनुमति दी गई है। वहीं इराक के जहाजों से शुल्क लिया जा रहा है या नहीं, इस बारे में उन्होंने स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इस बयान से यह भी संकेत मिलता है कि ईरान अलग-अलग देशों के साथ अपने संबंधों और हितों के आधार पर समुद्री मार्ग के इस्तेमाल की अलग-अलग व्यवस्था कर रहा है।
चीन को राजनीतिक समर्थन के लिए दी गई छूट
ईरान ने चीन के जहाजों को भी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है। ईरानी सांसद के अनुसार, इसके पीछे चीन से राजनीतिक समर्थन हासिल करने का उद्देश्य है। चीन और ईरान के बीच लंबे समय से आर्थिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। चीन ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच चीन की भूमिका ईरान के लिए और महत्वपूर्ण हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन का रुख और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग तेहरान के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। ऐसे में चीनी जहाजों को रास्ते की सुविधा देना दोनों देशों के आपसी हितों से जुड़ा हुआ कदम माना जा रहा है। वहीं कतर की स्थिति भी इस मामले में अलग है। कतर दुनिया के प्रमुख प्राकृतिक गैस निर्यातक देशों में शामिल है। होर्मुज जलडमरूमध्य उसके ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में कतर के जहाजों को बिना शुल्क गुजरने की अनुमति देना क्षेत्रीय संबंधों और व्यापारिक जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच लिया गया फैसला
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर ईरान का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में सैन्य और राजनीतिक तनाव बना हुआ है। अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का संघर्ष समुद्री व्यापार के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। इस दौरान व्यापारिक जहाजों पर हमलों और समुद्री परिवहन में बाधाओं की खबरें भी सामने आती रही हैं। ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अपनी स्थिति का इस्तेमाल करते हुए कुछ देशों को विशेष छूट देने का रास्ता चुना है। इससे साफ है कि तेहरान समुद्री आवाजाही को केवल व्यापारिक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि अपने आर्थिक और कूटनीतिक हितों से जोड़कर देख रहा है।
वैश्विक बाजार पर भी पड़ सकता है असर
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति होती है। इसलिए इस मार्ग पर तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव आ सकता है। जहाजों के रास्ते बदलने से परिवहन खर्च और बीमा लागत भी बढ़ सकती है। भारत के लिए ईरान का यह फैसला राहत देने वाला है, लेकिन इसे पूरे समुद्री मार्ग पर सामान्य स्थिति बहाल होने के तौर पर नहीं देखा जा सकता। भारतीय जहाजों को मिली छूट के बावजूद सुरक्षा, ट्रांजिट शुल्क और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां महत्वपूर्ण बनी रहेंगी। कुल मिलाकर, भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को दी गई छूट ईरान की रणनीतिक नीति का हिस्सा दिखाई देती है। भारत के लिए इसका सबसे बड़ा महत्व दवाओं के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े समुद्री रास्तों को लेकर है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि यह व्यवस्था कितने समय तक जारी रहती है और इससे भारतीय व्यापारिक जहाजों को कितनी व्यावहारिक राहत मिलती है।















