वाराणसी। धर्म और आस्था की नगरी काशी में धनतेरस और अन्नकूट महापर्व को लेकर श्री काशी विश्वनाथ धाम में विशेष तैयारियां की गई हैं। इस अवसर पर मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान, विशेष पूजा-अर्चना और भव्य शृंगार का आयोजन किया जाएगा। मंदिर प्रशासन के अनुसार, 6 नवंबर को धनतेरस के दिन सुबह 4 बजे मां अन्नपूर्णा की विशेष पूजा, भव्य शृंगार और महाआरती होगी। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन शुरू होंगे। इस दौरान भक्तों को मां का पावन प्रसाद ‘खजाना’ भी वितरित किया जाएगा। धनतेरस का पर्व हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। वहीं, काशी में मां अन्नपूर्णा की आराधना का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां अन्नपूर्णा को अन्न, समृद्धि और पोषण की देवी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा की कृपा से किसी भी भक्त के घर में अन्न और भोजन की कमी नहीं रहती। इसी आस्था के साथ हर साल धनतेरस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां अन्नपूर्णा के दर्शन के लिए काशी पहुंचते हैं।
सुबह 4 बजे शुरू होंगे विशेष धार्मिक अनुष्ठान
मंदिर प्रशासन की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, धनतेरस के दिन सुबह 4 बजे मां अन्नपूर्णा की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद माता का भव्य शृंगार किया जाएगा और विधि-विधान से महाआरती संपन्न होगी। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, पूजा और आरती के दौरान विशेष मंत्रोच्चार तथा अन्य अनुष्ठान किए जाएंगे। महाआरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन की व्यवस्था शुरू होगी। इस दौरान भक्त माता के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर सकेंगे। धनतेरस के अवसर पर होने वाला यह आयोजन काशी की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। मंदिर प्रशासन की ओर से आयोजन को लेकर आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो। विशेष अवसरों पर काशी विश्वनाथ धाम में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। ऐसे में दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण रहता है।
मां अन्नपूर्णा के दर्शन के बाद मिलेगा पावन प्रसाद ‘खजाना’
धनतेरस के अवसर पर मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन के साथ श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण भी विशेष आकर्षण रहेगा। मंदिर प्रशासन के मुताबिक, महाआरती के बाद दर्शन करने वाले भक्तों को मां का पावन प्रसाद ‘खजाना’ वितरित किया जाएगा। काशी में मां अन्नपूर्णा के खजाने को लेकर श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था है। इसे माता के आशीर्वाद और समृद्धि के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। भक्त इस प्रसाद को श्रद्धापूर्वक ग्रहण करते हैं और अपने घरों में भी सुरक्षित रखते हैं। मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा के आशीर्वाद से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और अन्न का अभाव नहीं होता। धनतेरस पर इस प्रसाद को प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। हालांकि, प्रसाद वितरण की व्यवस्था मंदिर प्रशासन की ओर से निर्धारित नियमों और उपलब्धता के अनुसार की जाएगी।
अन्नकूट महापर्व पर भी होंगे विशेष आयोजन
धनतेरस के साथ ही श्री काशी विश्वनाथ धाम में अन्नकूट महापर्व को लेकर भी विशेष धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। अन्नकूट का पर्व भगवान को विभिन्न प्रकार के पकवानों और व्यंजनों का भोग लगाने की परंपरा से जुड़ा हुआ है। इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हुए अन्न और भोजन का विशेष महत्व बताते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अन्नकूट का पर्व गोवर्धन पूजा से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगाया जाता है। इसके साथ ही अन्न और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।काशी में अन्नकूट महापर्व का आयोजन धार्मिक उत्साह के साथ किया जाता है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भोग की परंपरा निभाई जाती है। श्री काशी विश्वनाथ धाम में भी इस अवसर पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
काशी में मां अन्नपूर्णा की पूजा का विशेष महत्व
काशी को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है, लेकिन यहां मां अन्नपूर्णा की उपासना का भी विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा ने भगवान शिव को भी अन्न का महत्व समझाया था। इसी कारण काशी में मां अन्नपूर्णा को नगर की पालनहार देवी के रूप में पूजा जाता है। मां अन्नपूर्णा का मंदिर काशी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से धनतेरस के दिन मां के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन का महत्व बढ़ जाता है। मान्यता के अनुसार, मां अन्नपूर्णा की कृपा से जीवन में अन्न, धन और समृद्धि बनी रहती है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु माता के दर्शन करते हैं और परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रहेंगी विशेष व्यवस्थाएं
धनतेरस और अन्नकूट महापर्व के अवसर पर काशी विश्वनाथ धाम में भक्तों की भीड़ बढ़ने की संभावना है। ऐसे में मंदिर प्रशासन के सामने दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं से अपील की जाती है कि वे मंदिर परिसर में निर्धारित व्यवस्थाओं का पालन करें और दर्शन के दौरान सहयोग बनाए रखें। इससे सभी भक्तों को व्यवस्थित तरीके से पूजा-अर्चना और दर्शन का अवसर मिल सकेगा। काशी में धनतेरस का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ यहां की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी दर्शाता है। मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन और पावन प्रसाद ‘खजाना’ प्राप्त करने की परंपरा श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है। इस बार भी 6 नवंबर को सुबह 4 बजे विशेष पूजा, भव्य शृंगार और महाआरती के बाद भक्तों के लिए दर्शन शुरू होंगे। धनतेरस और अन्नकूट महापर्व के इन आयोजनों के जरिए काशी में एक बार फिर भक्ति और उत्सव का विशेष माहौल देखने को मिलेगा।















