- कुर्बानी करना मुसलमानों पर वाजिब है,
- कुर्बानी और सफाई की अहमियत विषय पर तुर्कमानपुर में हुई महिलाओं की संगोष्ठी
संवाददाता- जाकिर अली
गोरखपुर। रविवार को मदरसा रजा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर में महिलाओं की ‘कुर्बानी की अहमियत’ विषय पर 32वीं माहाना दीनी संगोष्ठी हुई। कुरआन-ए-पाक की तिलावत शिफा नूर ने की। हम्द ओ नात सादिया, सना फातिमा, सुमैया व सना ने पेश की। अध्यक्षता ज्या वारसी ने की। संचालन मुबस्सिरा कुरैशी ने किया। मदरसे की छात्रा शिफा खातून व शालिबा ने सफाई की अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि अल्लाह तआला पाकी को पसंद करता है। पैगंबर इस्लाम सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम ने फरमाया कि पाकी आधा ईमान है। हमें अपने बदन, कपड़े, घर और आस पास के माहौल को साफ सुथरा रखना चाहिए। सफाई हमारी समाजी कर्तव्य ही नहीं बल्कि दीनी जिम्मेदारी भी है। लिहाज़ा अपने घर, मुहल्ले, और इलाके को साफ रखें। ईद-उल-अजहा (बकरीद) मुसलमानों का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है। इस मौके पर मुसलमान नमाज पढ़ने के साथ-साथ जानवरों की कुर्बानी देते हैं। दीन-ए-इस्लाम के अनुसार कुर्बानी करना हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है, जिसे अल्लाह ने मुसलमानों पर वाजिब करार दिया है। अल्लाह को पैगंबर हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम व पैगंबर हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी की अदा इतनी पसंद आई कि हर मालिके निसाब पर कुर्बानी करना वाजिब कर दिया। वाजिब का मुकाम फर्ज से ठीक नीचे है।
मुख्य वक्ता कारी मुहम्मद अनस रजवी ने कहा कुर्बानी का अर्थ होता है कि जान व माल को अल्लाह की राह में खर्च करना। इससे अमीर, गरीब इन अय्याम में खास बराबर हो जाते हैं। कुर्बानी हमें दर्स देती है कि जिस तरह से भी हो सके अल्लाह की राह में खर्च करो। कुर्बानी से भाईचारगी बढ़ती है। हदीस में है कि कुर्बानी हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है। जो इस उम्मत के लिए बरकरार रखी गई है और पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इसका हुक्म दिया गया है। हदीस में इसकी बेशुमार फजीलतें आई है। हदीस में है कि जिसने खुश दिली व तालिबे सवाब होकर कुर्बानी की तो वह जहन्नम की आग से बच जाएगा। हदीस में है कि जो रुपया ईद के दिन कुर्बानी में खर्च किया गया उससे ज्यादा कोई रुपया प्यारा नहीं। संचालन करते हुए मुअज्जमा कुरैशी ने कहा कि जिलहिज्जा माह की 10 तारीख को ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर्व मनाया जाता है। पर्व के मौके पर मुस्लिम समाज द्वारा लगातार तीन दिन तक कुर्बानी की जाती है। जिलहिज्जा माह में ही देश व दुनिया के लाखों मुसलमान हज अदा करते हैं। भारत से भी बड़ी संख्या में हज यात्री मक्का व मदीना शरीफ पहुंचे हुए हैं। अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़कर मुल्क में खुशहाली, तरक्की व अमन की दुआ की गई। शीरीनी बांटी गई। महफिल में में आस्मां खातून, हिना खातून, उमरा खातून, नूरजहां शरीफी, अदीबा, अलविया, फिजा खातून, शबनम खातून, तमन्ना, साहिबा खातून, अंजुम आरा आदि मौजूद रहीं।















