*मिशन शक्ति के तहत अब गांव-गांव पहुंचेगी महिला पुलिस, सुलझेंगी महिलाओं की समस्याएं।*
*संवाददाता- जाकिर अली*
गोरखपुर। महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा को संस्थागत मजबूती देने और लिंग आधारित हिंसा को रोकने के उद्देश्य से एनेक्सी सभागार में ‘बहू-बेटी सम्मेलन’ एकदिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यूनिसेफ और पी.जी.एस.एस. के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में जोन के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक अमले ने शिरकत की। संवेदनशीलता और संवाद पर जोर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) जोन,मुथा अशोक जैन ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि जोन सामाजिक दृष्टि से एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘बहू-बेटी सम्मेलन’ का मुख्य उद्देश्य महिला पुलिस कर्मियों द्वारा ए.एन.एम.,आशा बहू और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के समन्वय से विवाहित महिलाओं और किशोरियों से सीधा संवाद स्थापित करना है। इसका लक्ष्य 18-35 वर्ष की महिलाओं में घरेलू हिंसा व दहेज उत्पीड़न जैसी घटनाओं को रोकना और 15-18 वर्ष की बालिकाओं की काउंसलिंग करना है। थाने बनेंगे सुरक्षित स्थान विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, डॉ. कौस्तुभ ने अपने संबोधन में पुलिस कर्मियों को महिलाओं से संबंधित विषयों के प्रति विशेष संवेदनशीलता बरतने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि केवल जागरूकता अभियान काफी नहीं है, बल्कि थानों में स्थित ‘मिशन शक्ति’ केंद्रों को प्रभावी काउंसलिंग सेंटर के रूप में विकसित करना होगा ताकि महिलाएं वहां खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। मार्गदर्शिका और लोगो का अनावरण इस अवसर पर एडीजी जोन द्वारा ‘बहू-बेटी सम्मेलन’ से संबंधित एक मार्गदर्शिका और आधिकारिक ‘लोगो’ का अनावरण भी किया गया। कार्यशाला में महराजगंज, संतकबीरनगर और बलरामपुर के पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ यूनिसेफ के मंडलीय सलाहकार शैलेश प्रताप सिंह और पीजीएसएस के सह-निदेशक फादर लीजो ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान महिला पुलिस अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे ग्राम सभा स्तर पर जाकर महिलाओं की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। इस दौरान एसपी सिटी, एसपी साउथ और विभिन्न थानों के मिशन शक्ति प्रभारी भी मौजूद रहे।















