नयी दिल्ली: एसआईआर के नाम पर लोगों को मताधिकार से वंचित करके भाजपा द्वारा बंगाल में सत्ता पर क़ब्ज़ा न्यायपालिका के सहयोग से किया गया है. इसलिए भाजपा की जीत का श्रेय सिर्फ़ चुनाव आयोग को नहीं जाता. इसका बड़ा हिस्सा न्यायपालिका को भी जाता है. ये बातें कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने साप्ताहिक स्पीक अप कार्यक्रम की 246 वीं कड़ी में कहीं. शाहनवाज़ आलम ने कहा कि अप्रैल में बंगाल के एसआईआर से बाहर किए गए लोगों की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस बागची ने यह सवाल उठाया था कि अगर जीत का अंतर दो प्रतिशत हो और काटे गए नामों की संख्या 15 प्रतिशत हो तब क्या होगा? अब ख़ुद जस्टिस बागची को देश के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि उनकी शंका के सही हो जाने पर अब वो चुनाव परिणामों को वैध मानते हैं या नहीं. क्योंकि 50 से ज़्यादा सीटों पर काटे गए नामों की संख्या का अंतर जीत से ज़्यादा है. शाहनवाज़ आलम ने कहा उसी सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने यह भी टिप्पणी की थी कि जो लोग जाँच न होने के कारण मतदान से वंचित हो रहे हैं वो परेशान न हों क्योंकि वो अगली बार वोट कर सकते हैं. ऐसे लोग जिनकी जाँच नहीं हो सकी और जिसके लिए वो दोषी नहीं हैं, उनकी संख्या 27 लाख से ज़्यादा है. जिसका सीधा मतलब है कि अगर ये लोग मतदाता रहते तो चुनाव परिणाम यह नहीं होते. उन्होंने कहा कि यह भी सिर्फ संयोग नहीं है कि रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुब्रत गुप्ता को चुनाव आयोग ने एसआईआर की निगरानी के लिए विशेष ऑब्ज़र्वर बनाया था जो चुनाव बाद मुख्यमंत्री के सलाहकार बना दिए गए हैं.










