नई दिल्ली। इस बार धनतेरस का पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा। दीपावली से पहले आने वाले इस त्योहार पर सोना, चांदी और नए बर्तन खरीदने की परंपरा है। खासतौर पर भारतीय परिवारों में धनतेरस के दिन सोने के आभूषण खरीदना शुभ माना जाता है। यही वजह है कि त्योहार नजदीक आते ही सर्राफा बाजार में रौनक बढ़ने लगती है और लोग अपनी पसंद तथा बजट के अनुसार खरीदारी की तैयारी करते हैं। हालांकि, इस बार सोने की ऊंची कीमतें खरीदारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। 2 नवंबर 2026 को बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव अलग-अलग दरों के अनुसार करीब 1.39 लाख से 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास दर्ज किया गया। वहीं, 22 कैरेट सोने की कीमत करीब 1.27 लाख से 1.29 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच रही। बाजार में भाव लगातार बदलते रहते हैं। ऐसे में धनतेरस के दिन खरीदारी करने से पहले स्थानीय सर्राफा बाजार में ताजा रेट की जानकारी लेना जरूरी होगा।
धनतेरस पर सोना खरीदने की परंपरा
धनतेरस को धन और समृद्धि से जुड़ा पर्व माना जाता है। मान्यता के अनुसार, इस दिन नई वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ होता है। इसी परंपरा के चलते लोग सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के, बर्तन और अन्य उपयोगी सामान खरीदते हैं। कई परिवारों में धनतेरस की खरीदारी को साल की महत्वपूर्ण खरीदारी के रूप में देखा जाता है। सोने को भारतीय समाज में केवल आभूषण या सजावट की वस्तु नहीं माना जाता, बल्कि इसे बचत और संपत्ति के रूप में भी महत्व दिया जाता है। शादी-विवाह, पारिवारिक समारोह और विशेष अवसरों पर सोने के आभूषण खरीदने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। यही कारण है कि धनतेरस के अवसर पर सोने की दुकानों पर ग्राहकों की संख्या बढ़ जाती है। कुछ लोग इस दिन सोने के सिक्के खरीदना पसंद करते हैं, जबकि कई परिवार अपनी जरूरत के अनुसार अंगूठी, चेन, मंगलसूत्र, कंगन और अन्य आभूषण खरीदते हैं। वहीं, बजट कम होने पर लोग छोटे वजन के सिक्कों या हल्के आभूषणों का विकल्प भी चुनते हैं।
ऊंचे भाव के बीच खरीदारों की नजर बाजार पर
सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण इस बार खरीदारों की नजर बाजार के रुख पर भी बनी हुई है। त्योहार से पहले भाव में होने वाला बदलाव खरीदारी के बजट को प्रभावित कर सकता है। जिन परिवारों ने धनतेरस पर सोना खरीदने की योजना बनाई है, वे बाजार की कीमतों पर नजर रख रहे हैं। सोने की कीमत कई कारकों से प्रभावित होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग, डॉलर की स्थिति, ब्याज दरों से जुड़ी परिस्थितियां और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता जैसे कारक इसके भाव पर असर डाल सकते हैं। इसके अलावा घरेलू बाजार में मांग और आपूर्ति के आधार पर भी कीमतों में बदलाव देखने को मिलता है। धनतेरस और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान सोने की खरीदारी बढ़ने की संभावना रहती है। इसके साथ ही शादी-विवाह का मौसम भी आभूषण बाजार के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में सर्राफा कारोबारियों की नजर त्योहार के दौरान होने वाली बिक्री पर रहती है।
24 और 22 कैरेट सोने में क्या है अंतर?
सोना खरीदते समय उसकी शुद्धता को समझना भी जरूरी है। बाजार में आमतौर पर 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के आभूषण तथा उत्पाद उपलब्ध होते हैं। 24 कैरेट सोना अधिक शुद्ध माना जाता है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से सोने के सिक्के और निवेश से जुड़े उत्पादों में किया जाता है। वहीं, 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल आभूषण बनाने में अधिक होता है। इसमें सोने के साथ अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं, जिससे आभूषण को मजबूती मिलती है। 18 कैरेट सोने में सोने की मात्रा इससे कम होती है और इसका इस्तेमाल भी अलग-अलग डिजाइन के आभूषण बनाने में किया जाता है। इसलिए खरीदारी करते समय केवल सोने का भाव देखना पर्याप्त नहीं है। खरीदार को यह भी देखना चाहिए कि वह किस कैरेट का सोना खरीद रहा है और आभूषण का कुल वजन कितना है।
खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान
धनतेरस पर सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले खरीदारी के दिन का ताजा भाव पता करें। अलग-अलग शहरों और दुकानों में कीमतों में अंतर हो सकता है। इसके अलावा आभूषणों पर मेकिंग चार्ज और अन्य लागू शुल्क भी कुल कीमत को प्रभावित करते हैं। सोने के आभूषण खरीदते समय हॉलमार्क की जांच करना महत्वपूर्ण है। भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस का हॉलमार्क सोने की शुद्धता से संबंधित जानकारी देता है। खरीदार को आभूषण पर मौजूद हॉलमार्क और छह अंकों वाले एचयूआईडी नंबर की जांच करनी चाहिए। इसके साथ ही दुकानदार से पक्का बिल लेना भी जरूरी है। बिल में सोने की शुद्धता, वजन, प्रति ग्राम दर, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क का स्पष्ट विवरण होना चाहिए। इससे भविष्य में आभूषण बेचने या बदलने के दौरान भी खरीदार के पास खरीदारी का रिकॉर्ड रहता है।
बजट के अनुसार करें खरीदारी
सोने की कीमत अधिक होने पर खरीदारों के सामने बजट का सवाल भी रहता है। ऐसे में जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति भारी आभूषण ही खरीदे। लोग अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार छोटे सिक्के, हल्के आभूषण या अपनी जरूरत के दूसरे विकल्प चुन सकते हैं। धनतेरस का महत्व खरीदारी की मात्रा से अधिक परंपरा और शुभ अवसर से जुड़ा है। इसलिए बाजार में भाव बढ़ने या घटने के बावजूद लोग अपनी क्षमता के अनुसार खरीदारी करने की योजना बनाते हैं। इस बार 6 नवंबर को धनतेरस मनाया जाएगा। त्योहार से पहले सर्राफा बाजार में ग्राहकों की गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, सोने की कीमतों में होने वाले बदलाव के कारण खरीदारी का अंतिम फैसला लोग ताजा भाव और अपने बजट को ध्यान में रखकर ही करेंगे। बाजार के जानकारों के मुताबिक, ग्राहकों को जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय शुद्धता, वजन, मेकिंग चार्ज और बिल की पूरी जानकारी लेकर ही आभूषण खरीदना चाहिए।















