नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में समुद्री सतह का तापमान बढ़कर 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। समुद्र के बढ़ते तापमान के बीच क्षेत्र में चक्रवाती गतिविधियां तेज होने की बात सामने आई है। पहले अर्णब तूफान आया और अब मुरासु ने मौसम का मिजाज प्रभावित किया है। एक सप्ताह के भीतर दो तूफानों की स्थिति ने मौसम वैज्ञानिकों और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। समुद्र की सतह का तापमान चक्रवातों के बनने और उनकी तीव्रता बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही वजह है कि बंगाल की खाड़ी में तापमान बढ़ने की स्थिति को मौसम के लिहाज से अहम माना जा रहा है। समुद्र का तापमान बढ़ने से वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ सकती है। गर्म समुद्री सतह से अधिक जलवाष्प वातावरण में पहुंचती है, जो अनुकूल मौसमी परिस्थितियों में बादलों के निर्माण और चक्रवाती गतिविधियों को ऊर्जा दे सकती है। हालांकि, किसी तूफान के बनने और उसके प्रचंड रूप लेने के पीछे केवल समुद्री तापमान ही जिम्मेदार नहीं होता। वायुमंडलीय दबाव, हवाओं की दिशा, ऊपरी वायुमंडल में हवा की गति और समुद्र की गहराई तक मौजूद गर्म पानी जैसे कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं।
29 डिग्री पहुंचा समुद्री तापमान
बंगाल की खाड़ी में समुद्री सतह का तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचना मौसमी गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सामान्य तौर पर समुद्र की सतह का तापमान लगभग 26.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होने पर उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। गर्म समुद्र से मिलने वाली ऊर्जा चक्रवाती सिस्टम को मजबूत करने में मदद करती है। जब समुद्र से बड़ी मात्रा में नमी वायुमंडल में पहुंचती है और अन्य मौसमी परिस्थितियां भी अनुकूल रहती हैं, तब कम दबाव का क्षेत्र विकसित होकर गहरे दबाव और फिर चक्रवात का रूप ले सकता है। बंगाल की खाड़ी भौगोलिक रूप से भी चक्रवाती गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है। यहां बनने वाले तूफानों का असर भारत के पूर्वी तटीय राज्यों के अलावा आसपास के समुद्री क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में चक्रवाती सिस्टम की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाती है।
एक सप्ताह में दो तूफानों की स्थिति
बताई गई जानकारी के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में पहले अर्णब तूफान आया और अब मुरासु तूफान ने मौसम को प्रभावित किया है। एक सप्ताह के भीतर दो तूफानों की गतिविधि सामने आने से समुद्र में लगातार बदल रही मौसमी परिस्थितियों पर चर्चा तेज हो गई है। लगातार चक्रवाती गतिविधियां होने पर समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं। तटीय क्षेत्रों में तेज हवाओं और भारी बारिश की आशंका भी पैदा हो सकती है। इसके अलावा समुद्र में मछली पकड़ने जाने वाले मछुआरों के लिए भी परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। हालांकि, किसी तूफान का वास्तविक प्रभाव उसकी दिशा, गति, तीव्रता और समुद्र तट से दूरी पर निर्भर करता है। इसलिए केवल तूफान बनने की जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसका असर किसी विशेष राज्य या शहर में कितना होगा।
चक्रवातों को ताकत कैसे देता है गर्म समुद्र?
चक्रवातों के विकास में समुद्र की गर्म सतह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। समुद्र का पानी गर्म होने पर वाष्पीकरण की प्रक्रिया तेज होती है। इससे वातावरण में नमी बढ़ती है। जब यह नम हवा ऊपर उठती है तो ठंडी होकर संघनित होती है और बादलों का निर्माण होता है। इस प्रक्रिया में निकलने वाली गुप्त ऊष्मा वायुमंडल को अतिरिक्त ऊर्जा देती है। अनुकूल परिस्थितियों में यह ऊर्जा चक्रवाती सिस्टम को मजबूत करने में मदद करती है। इसी कारण समुद्री सतह का तापमान चक्रवातों की तीव्रता का आकलन करने वाला एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। लेकिन समुद्र का तापमान अधिक होने के बावजूद हर बार चक्रवात नहीं बनता। इसके लिए वातावरण में कम ऊर्ध्वाधर पवन कतरन, पर्याप्त नमी और अनुकूल वायुमंडलीय दबाव जैसी परिस्थितियों का होना भी जरूरी है।
तटीय इलाकों में बढ़ सकती है सतर्कता
बंगाल की खाड़ी में लगातार चक्रवाती गतिविधियों के बीच तटीय इलाकों में मौसम की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है। समुद्र में तूफानी परिस्थितियां बनने पर मछुआरों को समुद्र में जाने से रोकने के लिए चेतावनी जारी की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करनी पड़ती है। चक्रवात के दौरान तेज हवाओं से पेड़, बिजली के खंभे और कमजोर निर्माण प्रभावित हो सकते हैं। भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने से तटीय बस्तियों और समुद्र के किनारे स्थित ढांचों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। ऐसी परिस्थितियों में मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना जरूरी होता है। मछुआरों और समुद्र तट के आसपास रहने वाले लोगों को प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।
जलवायु परिवर्तन से भी जुड़ा है समुद्री तापमान
समुद्री सतह के तापमान में लंबे समय तक होने वाली बढ़ोतरी को जलवायु परिवर्तन के व्यापक संदर्भ में भी देखा जाता है। वैश्विक तापमान बढ़ने के साथ महासागरों में भी गर्मी जमा हो रही है। समुद्र पृथ्वी की अतिरिक्त गर्मी का बड़ा हिस्सा अवशोषित करते हैं, जिसका असर समुद्री पारिस्थितिकी और मौसम की प्रक्रियाओं पर पड़ता है। गर्म समुद्री पानी कुछ परिस्थितियों में चक्रवातों को अधिक ऊर्जा उपलब्ध करा सकता है। इससे उनके तेजी से मजबूत होने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, किसी विशेष तूफान को सीधे जलवायु परिवर्तन का परिणाम बताने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत होती है। बंगाल की खाड़ी में 29 डिग्री तापमान और कम समय में दो तूफानों की गतिविधि समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों पर नजर रखने की जरूरत को रेखांकित करती है। मौसम वैज्ञानिकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि समुद्र की गर्मी, हवाओं की दिशा और वातावरण में नमी मिलकर किस तरह चक्रवाती सिस्टम को प्रभावित कर रहे हैं।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर रहेगी नजर
फिलहाल बंगाल की खाड़ी में समुद्री तापमान बढ़ने और लगातार चक्रवाती गतिविधियों की खबरों के बीच मौसम के अगले बदलावों पर नजर रखी जा रही है। किसी भी तूफान का असर किन राज्यों और तटीय क्षेत्रों तक पहुंचेगा, इसका आकलन उसकी मौजूदा स्थिति और आगे की दिशा के आधार पर किया जाता है। मौसम विभाग की ओर से जारी आधिकारिक बुलेटिन में तूफान की स्थिति, हवा की रफ्तार, संभावित मार्ग और बारिश के पूर्वानुमान की जानकारी दी जाती है। ऐसे में लोगों के लिए जरूरी है कि वे अपुष्ट सूचनाओं के बजाय आधिकारिक मौसम चेतावनियों पर भरोसा करें।















