- भव्य गौ कथा के द्वितीय दिवस पर उमड़ा जनसैलाब, राष्ट्रभावना व संस्कृति का संदेश*
वाराणसी। जनपद के मुस्तफाबाद, चिरई गांव में आयोजित भव्य गौ कथा के द्वितीय दिवस पर प्रख्यात वक्ता मोहम्मद फैज़ खान ने राष्ट्र सर्वोपरि की भावना पर जोर देते हुए कहा कि “सभी पंथ और मजहब से बड़ा राष्ट्र होता है।” उनके इस संदेश को उपस्थित जनसमूह ने सराहा। अपने संबोधन में उन्होंने वैदिक वाक्य “गावो विश्वस्य मातरः” का उल्लेख करते हुए गौ माता के धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गाय केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी है। गोबर से बनी जैविक खाद जहां भूमि की उर्वरता बढ़ाती है, वहीं बायोगैस के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा प्राप्त होती है। साथ ही, दूध को पोषण का प्रमुख स्रोत बताया। वक्ता ने भारतीय संस्कृति को करुणा, सहअस्तित्व और जीवन संरक्षण की संस्कृति बताते हुए कहा, “हमारी संस्कृति गौमूत्र पीने की है, खून पीने की नहीं।” उन्होंने पंचतत्व—भूमि, अग्नि, वायु, जल और आकाश—के संतुलन में पंचगव्य की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्वर्गीय रूपेश पांडे को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें सच्चा राष्ट्रभक्त बताया और उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। गौ कथा के द्वितीय दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजन स्थल पर भक्ति, राष्ट्रभावना और सांस्कृतिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला। इस अवसर पर सुधीर सिंह पप्पू, अभिषेक सिंह, शशि भूषण सिंह, विश्वजीत सिंह, लोकपति सिंह, उदय प्रताप सिंह पिंटू, वरुण सिंह, कृष्णकांत पाठक, डॉ. कुंदन सिंह, रितेश श्रीवास्तव, नागेश उपाध्याय, विनय कुमार सिंह सहित अनेक लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय सिंह गौतम ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन जितेंद्र सिंह जित्तू द्वारा किया गया।















