वाराणसी: बनारस की सड़कों पर केवल छोटे और गरीब दुकानदारों के पेट पर लात मारने की दोहरी नीति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शहर की स्वच्छता, सुरक्षा और नैतिक माहौल के नाम पर प्रशासन की ‘चुनिंदा कार्रवाई’ के खिलाफ समाजवादी पार्टी ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। मंगलवार को सपा नेताओं और प्रबुद्ध नागरिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी वाराणसी सतेन्द्र कुमार को एक बेहद कड़ा और चेतावनी भरा ज्ञापन सौंपा। “शराब के ठेके और बार बंद हों, तभी पूरी होगी स्वच्छता” प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे फायरब्रांड समाजवादी नेता जीशान अंसारी ने दोटूक शब्दों में कहा “महापौर महोदय का स्वच्छता को लेकर लिया गया फैसला तब तक एक ढोंग और अधूरा कदम है, जब तक इसमें शहर के बीचों-बीच जहर उगल रहे शराब के ठेकों और बार को शामिल नहीं किया जाता। समाजवादी विचारधारा समाज के हर वर्ग के कल्याण और एक भयमुक्त, स्वस्थ वातावरण की पक्षधर है। हमारी साफ मांग है कि शहर के भीतर चल रही सभी देशी-विदेशी शराब की दुकानों और आलीशान बार के लाइसेंस तत्काल निरस्त कर उन्हें नगर निगम की सीमा से बाहर निकाला जाए।” सपा नेता शुभम सेठ ‘गोलू’ ने प्रशासन की नीयत पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अपनी रोजी-रोटी कमाने वाले छोटे मांस विक्रेताओं को शहर से बाहर खदेड़ा जा रहा है, तो रसूखदार और रईसों के बड़े-बड़े मांसाहारी होटलों व रेस्टोरेंटों पर भाजपा महापौर की आंखें क्यों बंद हैं ? व्यवस्था का पैमाना सबके लिए एक होना चाहिए। इन आलीशान होटलों को भी आवासीय और व्यापारिक क्षेत्रों से उखाड़कर शहर के बाहर एक निश्चित ज़ोन में भेजा जाए। अमीरों को छूट और गरीबों पर ‘बुलडोजर नीति’ अब नहीं चलेगी। कानूनी और सामाजिक मोर्चे पर प्रशासन को घेरते हुए सपा नेता शिवेंद्र राय ने चेतावनी दी कि शहर के बीचों-बीच स्थित शराब के ठेके और बार अपराधियों के अड्डे बन चुके हैं। देर रात तक होने वाले हुड़दंग, छेड़खानी और असामाजिक गतिविधियों के कारण महिलाओं और बच्चों का सड़कों पर निकलना दूभर हो चुका है। शहर को सुरक्षित करने के लिए इन्हें हर हाल में हटाना होगा। वहीं, अधिवक्ता आलोक सौरभ और अधिवक्ता अभिषेक झा ने संयुक्त रूप से कहा कि प्रशासन की नीतियां निष्पक्ष होनी चाहिए, न कि पूंजीपतियों के हक में। अगर स्वच्छता और सुव्यवस्था के नाम पर छोटे दुकानदारों की दुकानें उजाड़ी जा रही हैं, तो अमीरों के आलीशान नॉन-वेज रेस्टोरेंटों को किस कानून के तहत वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है ? इस भेदभाव को तुरंत बंद कर महापौर के निर्णय के दायरे में इन बड़े होटलों को भी लाया जाए। कार्यक्रम के अंत में संयोजक आनंद यादव ने प्रशासन को आखिरी चेतावनी देते हुए कहा “जनहित के इस गंभीर मुद्दे पर प्रशासन तुरंत संज्ञान ले और संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दे। इसे हमारी प्रार्थना न समझा जाए यह जनता का अल्टीमेटम है। अगर रसूखदारों और शराब माफियाओं को बचाने की कोशिश की गई, तो समाजवादी लोग इस लड़ाई को सड़क से लेकर सदन तक लड़ने के लिए पूरी तरह बाध्य होंगे।” कार्यक्रम में मुख्य रूप से अधिवक्ता अमरेंद्र पांडेय, पुनीत मौर्य, अमित कुमार “विक्की”, राज श्रीवास्तव, कैफ अहमद, रितेश गुप्ता, धीरू चौबे, सोनू सोनकर, फरहान सिद्दीकी, आरिफ खान आदि उपस्थित रहे।














