संवाददाता : मोहम्मद तसलीम
कानपुर देहात। 16 अप्रैल 2026 को विकासनगर क्षेत्र में लगी भीषण आग ने ऐसा तांडव मचाया कि देखते ही देखते कई परिवारों की दुनिया उजड़ गई। लपटों ने न सिर्फ मकानों को निगल लिया, बल्कि लोगों के वर्षों के सपनों, मेहनत और जमा-पूंजी को भी राख में तब्दील कर दिया। आग के बाद पूरे इलाके में धुएं, चीख-पुकार और बेबसी का मंजर पसरा रहा—हर आंख नम और हर चेहरा मायूस दिखाई दे रहा था। इसी दर्दनाक घड़ी में जनपद कानपुर देहात के भाल गांव के मूल निवासी और भारतीय सेना में तैनात जवान उत्कर्ष द्विवेदी ने इंसानियत की मिसाल पेश की। जैसे ही उन्हें घटना की जानकारी मिली, वे बिना देर किए मौके पर पहुंच गए और पीड़ित परिवारों के बीच खड़े होकर उनके दुख को साझा किया। मौके पर हालात इतने भयावह थे कि लोग अपने जले हुए घरों के सामने खड़े बस खामोशी से सब कुछ देख रहे थे। किसी के सिर से छत छिन गई थी, तो कोई अपने बच्चों को संभालने की कोशिश में जुटा था। इस हृदयविदारक दृश्य ने उत्कर्ष द्विवेदी को भीतर तक झकझोर दिया, लेकिन उन्होंने खुद को संभालते हुए तुरंत राहत कार्य में जुटने का निर्णय लिया। उन्होंने बिना किसी औपचारिकता के जरूरतमंदों के बीच फल, छाछ, दही, बिस्किट और जूस जैसी जरूरी खाद्य सामग्री का वितरण शुरू किया। तेज गर्मी और अव्यवस्थित हालात के बावजूद वे लगातार एक से दूसरे परिवार तक पहुंचते रहे, यह सुनिश्चित करते हुए कि कोई भी पीड़ित भूखा या प्यासा न रहे। उनकी सक्रियता और समर्पण ने वहां मौजूद लोगों को बड़ी राहत दी।
उत्कर्ष का योगदान केवल राहत सामग्री तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने पीड़ितों से बातचीत कर उनका हौसला बढ़ाया, उनके दुख को सुना और उन्हें यह भरोसा दिलाया कि वे इस संकट में अकेले नहीं हैं। उनके शब्द और व्यवहार, दोनों ही लोगों के लिए संबल बने।
आज जब समाज में संवेदनाएं अक्सर औपचारिकताओं तक सिमटती जा रही हैं, ऐसे समय में उत्कर्ष द्विवेदी का यह कदम सच्ची मानवता और सेवा भाव का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है। उनकी यह पहल न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि देशभक्ति सिर्फ सरहदों की रक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि अपने समाज के हर दुख-दर्द में साथ खड़े होने में भी निहित है।
गौरतलब है कि उत्कर्ष द्विवेदी मूल रूप से ग्राम भाल, जनपद कानपुर देहात के निवासी हैं और वर्तमान में लखनऊ में भारतीय सेना में तैनात हैं। उनका यह कार्य क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गया है।















