तेहरान। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक असामान्य और विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। इसमें संभावित परमाणु विस्फोट और उससे फैलने वाले रेडियोधर्मी संदूषण से बचाव के तरीके बताए गए हैं। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी IRNA की ओर से जारी आठ मिनट के एक शैक्षिक वीडियो में लोगों को बताया गया है कि परमाणु हमला होने की स्थिति में उन्हें किस तरह अपनी जान बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। इस वीडियो में सुरक्षित स्थान पर छिपने, घरों और इमारतों के बेसमेंट में रहने, एयर कंडीशनर बंद रखने और कम से कम 24 घंटे तक शेल्टर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई है। यह गाइडलाइन ईरान के इस्फहान प्रांत की आपातकालीन सेवाओं की ओर से जारी की गई है। इसमें परमाणु विस्फोट के बाद उत्पन्न होने वाले खतरों और रेडियोधर्मी कणों से बचाव के लिए जरूरी सावधानियों पर जोर दिया गया है। इस तरह की विस्तृत सार्वजनिक सुरक्षा एडवाइजरी जारी होना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ईरान और अमेरिका तथा इजरायल के बीच सैन्य तनाव का माहौल बना हुआ है। हालांकि, एडवाइजरी जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि परमाणु हमला होने वाला है, बल्कि इसे संभावित आपात स्थिति के लिए नागरिकों को तैयार करने की पहल के रूप में देखा जाना चाहिए।
परमाणु हमले की स्थिति में बेसमेंट में छिपने की सलाह
IRNA के आठ मिनट के वीडियो में नागरिकों को बताया गया है कि परमाणु विस्फोट की स्थिति में सबसे पहले सुरक्षित स्थान पर पहुंचना जरूरी है। लोगों को सलाह दी गई है कि यदि वे किसी इमारत के अंदर हैं तो उसके बेसमेंट या भूमिगत हिस्से में चले जाएं। भूमिगत स्थान रेडियोधर्मी कणों और विस्फोट के बाद फैलने वाले खतरनाक प्रभावों से कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। परमाणु विस्फोट के बाद केवल धमाके का प्रभाव ही खतरा नहीं होता, बल्कि वातावरण में फैलने वाली रेडियोधर्मी धूल और कण भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। ये कण हवा के साथ दूर तक फैल सकते हैं और खुले वातावरण में मौजूद लोगों के शरीर, कपड़ों तथा आसपास की वस्तुओं पर जमा हो सकते हैं। ऐसे में सुरक्षित और बंद स्थान पर रहना जोखिम को कम करने का एक महत्वपूर्ण उपाय माना जाता है। एडवाइजरी में लोगों को बिना जरूरत घरों या सुरक्षित इमारतों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई है। खास तौर पर विस्फोट के बाद शुरुआती समय में खुले वातावरण से दूरी बनाए रखने पर जोर दिया गया है।
एयर कंडीशनर और वेंटिलेशन सिस्टम बंद रखने की हिदायत
ईरान की ओर से जारी वीडियो में एयर कंडीशनर और हवा अंदर लाने वाले अन्य उपकरणों को बंद रखने की सलाह भी दी गई है। इसके पीछे मुख्य वजह रेडियोधर्मी कणों को घरों और इमारतों के अंदर प्रवेश करने से रोकना है। दरअसल, परमाणु विस्फोट के बाद हवा में रेडियोधर्मी धूल और अन्य खतरनाक कण फैल सकते हैं। यदि इमारतों के एयर कंडीशनिंग या वेंटिलेशन सिस्टम बाहर की हवा को अंदर खींच रहे हों, तो इन कणों के कमरे के भीतर पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए ऐसी स्थिति में बाहरी हवा का प्रवेश सीमित करना जरूरी हो जाता है। एडवाइजरी में नागरिकों को खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने तथा सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई है। इसका उद्देश्य रेडियोधर्मी संदूषण के संपर्क में आने की आशंका को कम करना है। लोगों को यह भी समझाने की कोशिश की गई है कि परमाणु विस्फोट के बाद दिखाई देने वाले खतरे के अलावा ऐसे अदृश्य कण भी नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिन्हें सामान्य आंखों से देख पाना संभव नहीं होता।
कम से कम 24 घंटे तक शेल्टर से बाहर न निकलें
इस एडवाइजरी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा नागरिकों को कम से कम 24 घंटे तक सुरक्षित शेल्टर के अंदर रहने की सलाह देना है। वीडियो में बताया गया है कि परमाणु विस्फोट के बाद रेडियोधर्मी संदूषण का खतरा बना रह सकता है। इसलिए लोगों को जल्दबाजी में बाहर निकलने से बचना चाहिए। परमाणु विस्फोट के बाद रेडियोधर्मी पदार्थ वातावरण में फैल सकते हैं। विशेष रूप से विस्फोट के बाद जमीन पर गिरने वाले रेडियोधर्मी कणों को न्यूक्लियर फॉलआउट कहा जाता है। ये कण आसपास के क्षेत्रों को दूषित कर सकते हैं। इनका प्रभाव हवा की दिशा, मौसम, विस्फोट की प्रकृति और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसी वजह से परमाणु आपातकाल की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर रहना बेहद महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, 24 घंटे की अवधि को हर परिस्थिति में अंतिम सुरक्षित समय नहीं माना जा सकता। वास्तविक खतरे के स्तर और बाहर निकलने के समय का निर्धारण संबंधित आपातकालीन और विकिरण सुरक्षा अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार किया जाना चाहिए।
रेडियोधर्मी संदूषण से बचाव पर विशेष जोर
ईरान की इस एडवाइजरी में रेडियोधर्मी संदूषण से बचने के उपायों को प्रमुखता दी गई है। परमाणु विस्फोट के दौरान अत्यधिक ऊर्जा और विकिरण निकलता है। इसके अलावा विस्फोट के बाद रेडियोधर्मी पदार्थ वातावरण में फैल सकते हैं। इनके संपर्क में आने से इंसानों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। रेडियोधर्मी संदूषण का खतरा केवल विस्फोट वाले स्थान तक सीमित नहीं रहता। हवा और मौसम की परिस्थितियों के आधार पर इसके कण अन्य इलाकों तक भी पहुंच सकते हैं। इसलिए संभावित परमाणु आपातकाल में नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर रहने, बाहरी वातावरण से संपर्क कम करने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की जरूरत होती है। यदि कोई व्यक्ति रेडियोधर्मी धूल के संपर्क में आने की आशंका वाले खुले स्थान से सुरक्षित इमारत में पहुंचता है, तो उसके कपड़ों और शरीर पर मौजूद दूषित कणों को हटाना भी महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे मामलों में अधिकारियों की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार सावधानी बरतनी चाहिए।
अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव के बीच बढ़ी चिंता
ईरान की ओर से जारी यह एडवाइजरी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और इजरायल के साथ उसके सैन्य संबंधों को लेकर क्षेत्रीय सुरक्षा की चिंताएं बनी हुई हैं। परमाणु कार्यक्रम, सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय रणनीतिक हितों को लेकर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच लंबे समय से तनाव रहा है। ऐसे माहौल में नागरिकों को परमाणु आपातकाल से बचाव के तरीके समझाने के लिए वीडियो जारी करना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींच रहा है। विशेष रूप से इस्फहान प्रांत का नाम महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ईरान के प्रमुख औद्योगिक और परमाणु गतिविधियों से जुड़े क्षेत्रों में शामिल रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस एडवाइजरी को किसी निश्चित हमले की चेतावनी या परमाणु हमले की पुष्टि के रूप में पेश नहीं किया गया है। यह नागरिक सुरक्षा से जुड़ा एक एहतियाती कदम है। इसका उद्देश्य संभावित आपात स्थिति में लोगों को घबराहट से बचाते हुए सही निर्णय लेने के लिए तैयार करना है।
नागरिकों को सतर्क रहने का संदेश
ईरान की इस एडवाइजरी से स्पष्ट है कि वहां की आपातकालीन सेवाएं संभावित परमाणु संकट की स्थिति में नागरिकों को सुरक्षा उपायों की जानकारी देने पर जोर दे रही हैं। आठ मिनट के शैक्षिक वीडियो के जरिए लोगों को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि संकट के समय कहां जाना है, किन उपकरणों को बंद रखना है और कितनी देर तक सुरक्षित स्थान पर रहना चाहिए। फिलहाल इस एडवाइजरी को लेकर सबसे अधिक चर्चा इसके जारी होने के समय और इसमें बताए गए सुरक्षा उपायों को लेकर है। अमेरिका और इजरायल के साथ सैन्य तनाव के बीच इस तरह की चेतावनी ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताओं को फिर सामने ला दिया है। हालांकि, किसी संभावित हमले को लेकर निष्कर्ष निकालने के बजाय इसे आपातकालीन तैयारी के तौर पर देखना जरूरी है।















