फतेहपुर। फिल्मी तारानों के साथ शाम गहरी होते मटकते हुरियारे, बजते ढोल-नगाड़े और उड़ता रंग-अबीर गुलाल। शहर में शाम यही माहौल रहा। होलिका दहन के साथ ही हरे, नीले, पीले, रंग, अबीर गुलाल उड़ने लगे। ढोलक-मंजीरों की तान पर खूब फागों का दौर चला। पुजारियों ने मंत्रोच्चारण के बीच होलिका दहन कराया। कल (आज) शहर रंगों के पर्व में डूबा होगा, हुरियारे धमाल मचाएंगे। जगह-जगह हुरियारों की टोलियां घूमेंगी। एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर गले मिलेंगे और पर्व मनाएंगे। होलिका दहन को लेकर इस बार लोगों में असमंजस की स्थिति रही। पहली बार ऐसा हो रहा कि होलिका दहन के दूसरे दिन नहीं बल्कि तीसरे दिन रंगोत्सव होगा। बीती रात शुभ मुर्हुत में विधि विधान के साथ होलिका दहन किया गया। इसके बाद एक दूसरे को अबीर, गुलाल लगाकर पर्व ही बधाई दी गई। होली के गीत जगह-जगह सुनाई देने लगे। कई जगह कॉकटेल के दौर भी खूब चले। वहीं किराना से लेकर मिठाई की दुकानों और रंग, गुलाल, पिचकारी की दुकानों पर जमकर लोगों की भीड़ उमड़ी। हालांकि हर्बल, रंग, गुलाल ज्यादा पसंद किए गए। पिचकारी, मुखौटे भी समेत बाजारों में अन्य जरूरी सामानों की खरीदारी हुई। बच्चों ने मनपसंद पिचकारी ली। होली के साथ गन्ने की भी परंपरा जुड़ी हुई है। लोग होलिका दहन के दौरान गेहूं की बाली को भून कर लाते हैं आग की तपिश के कारण बाली को हाथ से पकड़ कर भूनना आसान नहीं हैं इस कारण लोग गन्ने के पत्तों के साथ बाली को बांध देते हैं और उसे दूर से ही भून लाते हैं। होली के त्योहार पर इस बार गन्ने के दाम पिछले वर्ष की अपेक्षा काफी बढे़ हुए हैं और लोग महंगे गन्ने खरीदने को मजबूर हैं। 30 रुपए से लेकर 50 रुपए तक गन्ने के जोड़े बाजारों में बिके। गेहूं की बाली व हरा चना भी 20 रुपए से लेकर 30 रुपए की गड्डी बनाकर बेचा गया।















