सरीला(हमीरपुर) : जिलाधिकारी घनश्याम मीना के सख्त निर्देशों के बावजूद जिले में इन दिनों मौरंग कारोबारी अवैध खनन करने से चूक नहीं रहे हैं। मौरंग कारोबारी नदी की जलधारा को प्रभावित कर खुलेआम मौरंग का अवैध खनन कर रहे हैं। ओवरलोड ट्रक को रोकने के लिए कैमरे लगे हुए हैं। लेकिन कई ट्रकों में नंबर प्लेट नहीं हैं और कई ट्रकों में नंबर प्लेट साफ नहीं दिख रही है। नियमों को दरकिनार कर मोरंग से भरे ओवरलोड ट्रक लगातार निकाले जा रहे हैं। वहीं सरकार द्वारा मजदूरों से मौरंग भरने की अनुमति दी गई है। लेकिन खनन कारोबारी प्रतिबंधित पोकलैंड मशीनों से यह कारोबार कर रहे हैं। जिससे एनजीटी के नियमों की धज्जियां उड़ती हुई साफ दिखाई दे रही है। तहसील क्षेत्र के चंडौत खंड संख्या 21/1 में खनन कारोबारी द्वारा दिन-रात बेतवा नदी की जलधारा पर अस्थाई मार्ग बनाकर हैवी मशीनों से लाल सोने की निकासी की जा रही है। प्रशासन की लाख कार्यवाही के बाद भी चंडौत खंड संख्या एक के मौरंग कारोबारी के हौसले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। मौरंग खदान में लगभग आधा दर्जन प्रतिबंधित मशीनों का प्रयोग कर जीवनदायनी बेतवा नदी की बीच धार में कई फुट नीचे से मौरंग का अवैध खनन कर एनजीटी के नियमों को लगातार चुनौती दी जा रही है। बेतवा नदी में खण्ड संचालक इस खदान में अस्थाई मार्ग बनाकर अवैध खनन किया जा रहा है। ओवरलोड ट्रकों को निकाल सड़कों का भी सत्यानाश किया जा रहा है। बता दें कि जिले में करीब दो दर्जन से अधिक मौरंग खदाने संचालित हो रही हैं। चंडौत खण्ड संख्या एक के मौरंग कारोबारी हैवी मशीनों से खनन कर खनिज विभाग के राजस्व को तगड़ा झटका दे रहे हैं। एसडीएम बलराम गुप्ता ने बताया कि अवैध खनन की जांच की जाएगी।
एनजीटी के नियम: बॉक्स एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के नियमों के अनुसार किसी भी मौरंग खदान में नदी के बीच में खनन नहीं किया जाएगा। सिर्फ नदी के किनारे स्थित मौरंग को ही उठाया जाएगा। पोकलैंड जैसी भारी मशीनों का प्रयोग खनन कार्य में नहीं किया जाएगा। खनन के दौरान यह ध्यान रखा जाएगा कि खनन से जलीय जीवों और पर्यावरण को कोई नुकसान ना हो साथ ही तीन मीटर से अधिक गहराई में मौरंग की निकासी नहीं की जाएगी। लेकिन मौरंग कारोबारी लगातार इन नियमों को चुनौती देकर खनन करने में जुटा है। वहीं प्रशासन की हीला हवाली के चलते इन कारोबारियों के हौसले बुलंद है।















