किरन शर्मा
वाराणसी। सनातन जागृति शक्तिपीठ ट्रस्ट के तत्वावधान में सारनाथ क्षेत्र के बरईपुर स्थित शक्तिपीठ पीठाधीश्वरी धाम, बाबा नीम करौली आश्रम में नीम करौली बाबा के पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिन भक्ति और ज्ञान के संदेशों से ओत-प्रोत रहा। कथा व्यास पूज्य पं. आलोक कृष्ण जी महाराज ने श्रद्धालु श्रोताओं को कथामृत का रसपान कराते हुए शुकताल में गंगा तट पर विराजमान राजर्षि परीक्षित और परमहंस श्री शुकदेव जी के संवाद का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जीवन के अंतिम समय को सुधारने और भगवान की प्राप्ति के लिए मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर भक्ति मार्ग अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज का संसारी जीव रात को निद्रा और भोग-विलास में तथा दिन में धन कमाने और परिवार के पालन-पोषण में व्यस्त रहकर मृत्यु को भूल जाता है। इसी कारण वह भगवत भजन से वंचित रह जाता है और अधोगति को प्राप्त होता है। मृत्यु को सुधारने के लिए संसार छोड़कर वन जाने की आवश्यकता नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करते हुए मन को भगवान के चरणों में समर्पित करना ही सच्चा मार्ग है। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के मुरली धारण करने का उल्लेख करते हुए महाराज जी ने कहा कि मुरली सदा मधुर स्वर में गाती है, जो हमें मधुर और सत्य वचन बोलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि मीठे और सत्य वचन से परिवार और समाज में कभी विघटन नहीं होता, इसलिए हमें सदैव “सत्यमेव जयते” के मार्ग पर चलना चाहिए।
कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे वातावरण में भक्ति और श्रद्धा का संचार होता रहा।















