*विकास कार्यों की समीक्षा में अफसरों की लगाई क्लास, गुणवत्ता पर समझौते पर दी कड़ी चेतावनी*
*संवाददाता- जाकिर अली*
गोरखपुर। सरकारी धन का उपयोग और विकास कार्यों की गति को लेकर मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को मंडलायुक्त सभागार में 10 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि निर्माण कार्यों में सुस्ती और गुणवत्ता में कमी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुस्त रफ्तार पर जताई नाराजगी बैठक के दौरान जब मंडलायुक्त ने विभिन्न विभागों के निर्माण कार्यों का खाका देखा, तो कुछ परियोजनाओं की धीमी गति पर उन्होंने गहरा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कड़े लहजे में पूछा कि आखिर तय समयसीमा के बावजूद कार्य पिछड़ क्यों रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि कार्यदायी संस्थाएं बाधाओं को तत्काल दूर कर प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बढ़ाएं। ग्राउंड जीरो पर उतरें अधिकारी
मंडलायुक्त ने केवल कागजी रिपोर्ट पर भरोसा न कर अधिकारियों को खुद फील्ड में उतरने का आदेश दिया। उन्होंने कहा,
अधिकारी केवल दफ्तरों में न बैठें, बल्कि नियमित रूप से स्थलीय निरीक्षण करें। निर्माण की गुणवत्ता की जांच मानकों के अनुरूप होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की शिकायत न आए।
प्रमुख बिंदु, बैठक की बड़ी बातें: पारदर्शिता और जवाबदेही, मंडलायुक्त ने कहा कि जनहित के कार्यों में पारदर्शिता सबसे अहम है। हर पैसे का हिसाब और काम की मजबूती दिखनी चाहिए। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने जिले की परियोजनाओं का विवरण दिया और भरोसा दिलाया कि लंबित कार्यों को प्राथमिकता पर पूरा किया जा रहा है। नगर और ग्रामीण विकास! नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने शहर के स्मार्ट प्रोजेक्ट्स और सीडीओ शाश्वत त्रिपुरारी ने ग्रामीण विकास योजनाओं की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया।
इनकी रही मौजूदगी बैठक में जिलाधिकारी दीपक मीणा,नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल, सीडीओ शाश्वत त्रिपुरारी,एसडीएम सदर दीपक गुप्ता, सहित निर्माण निगम और लोक निर्माण विभाग के तमाम बड़े अफसर मौजूद रहे। मंडलायुक्त ने अंत में साफ कर दिया कि अगली समीक्षा बैठक तक सभी खामियां दूर हो जानी चाहिए।















