नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि कोरोना महामारी से लेकर पश्चिम एशिया में जारी संकट तक, पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इन मुश्किल हालात के बावजूद भारत ने न केवल परिस्थितियों को बेहतर तरीके से संभाला, बल्कि अपनी उच्च विकास दर भी बनाए रखी है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों को इस बात पर गर्व है कि देश ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अपनी आर्थिक प्रगति जारी रखी है। प्रधानमंत्री सोमवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और भारत की विकास यात्रा का उल्लेख किया। उनके संबोधन में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संकटों और चुनौतियों के बावजूद भारत ने आर्थिक स्थिरता और विकास की गति बनाए रखने का प्रयास किया है।
वैश्विक संकटों के बीच भारत की स्थिति
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में दुनिया ने एक के बाद एक कई बड़े संकट देखे हैं। कोरोना महामारी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, उद्योग और आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित किया। महामारी के बाद दुनिया के सामने आर्थिक गतिविधियों को सामान्य करने और विकास की गति वापस हासिल करने की चुनौती रही। इसी बीच पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को और जटिल बनाया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया का संकट अभी भी जारी है। ऐसे समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने अनिश्चितता बनी हुई है। अलग-अलग देशों को इन परिस्थितियों के प्रभावों से निपटने के लिए लगातार प्रयास करने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद भारत ने इन चुनौतियों का सामना किया और अपनी विकास दर को ऊंचा बनाए रखा। प्रधानमंत्री के मुताबिक, यह स्थिति देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने 140 करोड़ भारतीयों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने मुश्किल वैश्विक परिस्थितियों में भी अपनी आर्थिक प्रगति को बनाए रखा है।
ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियां
वैश्विक अर्थव्यवस्था की चर्चा के बीच नवीकरणीय ऊर्जा का विषय भी महत्वपूर्ण है। दुनिया में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। उद्योग, परिवहन, कृषि और घरेलू जरूरतों के लिए ऊर्जा की उपलब्धता किसी भी देश की आर्थिक गतिविधियों से सीधे जुड़ी होती है। ऐसे में ऊर्जा के भरोसेमंद स्रोतों के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों पर ध्यान देना भी जरूरी हो गया है। नवीकरणीय ऊर्जा को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के इस्तेमाल से पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने की संभावनाएं बनती हैं। इसके साथ ही ऊर्जा उत्पादन के नए विकल्प विकसित करने और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप व्यवस्था तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है। भारत जैसे बड़े देश के लिए ऊर्जा क्षेत्र का महत्व और अधिक है। यहां आबादी, उद्योगों और शहरीकरण के विस्तार के साथ ऊर्जा की मांग भी बढ़ती है। इसलिए ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण विषय है।
2030 तक 500 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की भविष्य की योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत आने वाले वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की दिशा में अपनी क्षमता का विस्तार करेगा। सरकार ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री ने इस लक्ष्य को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसे पूरा करने के लिए देश को लगातार प्रयास करने होंगे। भारत की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 300 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। इसमें सौर और पवन ऊर्जा के साथ अन्य गैर-जीवाश्म स्रोतों से मिलने वाली बिजली भी शामिल है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि भारत निर्धारित लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ेगा। उनके मुताबिक, आने वाले 10 से 11 वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में बड़े स्तर पर क्षमता का विस्तार करने की जरूरत होगी।
निवेश और तकनीक पर रहेगा जोर
भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 का आयोजन 2 से 5 नवंबर तक किया जा रहा है। इस चार दिवसीय सम्मेलन की थीम ‘इन्वेस्ट, इनोवेट, इंस्पायर’ यानी निवेश, नवाचार और प्रेरणा रखी गई है। इसका उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसरों को बढ़ावा देना, नई तकनीकों को प्रोत्साहित करना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है। सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इनमें 40 से अधिक मंत्री, नीति निर्माता, निवेशक, वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत से जुड़े लोग शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन भागीदार के रूप में इसमें हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा 13 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता, निवेश के अवसरों और विनिर्माण से जुड़ी संभावनाओं को प्रदर्शित करेंगे। इनमें उत्तर प्रदेश भी शामिल है। सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों और राज्यों के प्रतिनिधियों को निवेश और तकनीकी साझेदारी के अवसरों पर चर्चा करने का मंच मिलेगा।
400 से अधिक प्रदर्शक दिखाएंगे तकनीक
सम्मेलन के साथ आयोजित प्रदर्शनी में 400 से अधिक कंपनियों, निर्माताओं, तकनीक प्रदाताओं, स्टार्टअप और शोध संस्थानों के हिस्सा लेने की जानकारी दी गई है। यहां सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण से जुड़ी तकनीकों और समाधानों को प्रदर्शित किया जाएगा। ऊर्जा भंडारण इस क्षेत्र का एक अहम पहलू है। सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ऐसे में जरूरत के समय बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बेहतर भंडारण व्यवस्था विकसित करना जरूरी है। बैटरी तकनीक और ऊर्जा भंडारण की क्षमता बढ़ने से नवीकरणीय ऊर्जा का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत के लिए घरेलू स्तर पर तकनीक और उपकरणों का निर्माण भी महत्वपूर्ण है। इससे ऊर्जा क्षेत्र में बाहरी निर्भरता कम करने और देश में विनिर्माण को बढ़ावा देने की संभावनाएं बनती हैं। सम्मेलन में इन विषयों पर उद्योग जगत, निवेशकों और नीति निर्माताओं के बीच विचार-विमर्श किया जाएगा।
सौर ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन पर भी चर्चा
भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट के साथ अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) की नौवीं सभा और हरित हाइड्रोजन पर चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया जा रहा है। इन आयोजनों का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा के अलग-अलग क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाना है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में वित्तीय सहयोग, तकनीकी विकास और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने पर चर्चा होगी। वहीं हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, तकनीक, निवेश और बड़े स्तर पर इसके इस्तेमाल की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। हरित हाइड्रोजन को भविष्य के स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों में शामिल किया जा रहा है। इसके उत्पादन और उपयोग को बढ़ाने के लिए तकनीकी विकास, निवेश और जरूरी बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के जरिए इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और निवेशकों को एक साझा मंच उपलब्ध होगा।
ऊर्जा सुरक्षा को आर्थिक विकास से जोड़ने की कोशिश
प्रधानमंत्री के संबोधन का एक महत्वपूर्ण पहलू वैश्विक संकटों और ऊर्जा क्षेत्र के संबंध को लेकर रहा। कोरोना महामारी और पश्चिम एशिया में जारी संकट का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां किस तरह अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में ऊर्जा के भरोसेमंद स्रोतों का विकास किसी भी देश के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ बिजली और ईंधन की जरूरतें भी बढ़ रही हैं। उद्योगों के संचालन, परिवहन, कृषि और घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध कराना विकास की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार से ऊर्जा के नए स्रोत विकसित करने और पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने की दिशा में मदद मिल सकती है। समिट में निवेश, तकनीक और विनिर्माण को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए सरकारों, निजी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के बीच साझेदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यक्रम में कारोबार से कारोबार (बी2बी), कारोबार से सरकार (बी2जी) और सरकार से सरकार (जी2जी) स्तर की बैठकों की भी व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री ने वैश्विक संकटों के बीच भारत की विकास दर को बनाए रखने का उल्लेख करते हुए देश की आर्थिक स्थिति पर भरोसा जताया। उनके संबोधन से यह संकेत मिला कि सरकार आर्थिक विकास के साथ स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार को भी प्राथमिकता दे रही है। भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 इसी दिशा में निवेश, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।















