कानपुर देहात। रमजान का मुबारक महीना रहमतों और बरकतों वाला है रमजान बुराइयों से दूर रखकर इंसानियत का पैगाम देता है। रमजान में खुद को खुदा की राह में इबादत के लिए लगाना अपनी दुनियां और आखिरत को संवारना है। रमजान प्यार भाई चारे और इंसानियत का पैगाम देता है। इस पाक महीने में अल्लाह रोजेदारों पर अपनी रहमतों का खजाना लुटाता है। ये बातें सिकंदरा की खजूर वाली मस्जिद के इमाम हाफिज मुजीब रजा ने बताई। उन्होंने कहा कि हमे रमजान के महीने में एक दूसरे को मोहब्बत का पैगाम देकर इंसानियत मजबूत करना चाहिए। रोजा रखे नमाज पढ़ें इससे ईमान मजबूत होता है गरीबों की मदद कर दुआएं हासिल करे l
रोजे का असल मकसद महज भूख प्यास बर्दाश्त करना नहीं बल्कि रोजे की रुह पर काबू करना है। रोजे के दौरान झूठ बोलने, चुगली करने किसी पर बुरी निगाह डालने और हर छोटी से छोटी बुराई से दूर रहना जरुरी है । इसलिए पाक महीने की इन बरकतों, रहमतों को हासिल करने में कोताही न करे अल्लाह को राजी करने के लिए इबादतों में मशगूल रहे। गुरुवार को रमजान के 22 वें रोजे पर राजपुर, जल्लापुर अफसरिया पीतमपुर रमऊ सटटी समेत क्षेत्र की सभी मस्जिदों में रोजेदार के इबादतों का सिलसिला जारी रहा।















