- विकास कार्यों में लापरवाही पर डीएम सख्त, पाण्डेय हाता से धर्मशाला तक पैदल नापी सड़कें, अधिकारियों को दी चेतावनी।*
*संवाददाता- जाकिर अली*
गोरखपुर। जनता की समस्याओं और शहर के ऐतिहासिक स्वरूप को लेकर जिलाधिकारी दीपक मीणा का सख्त तेवर देखने को मिला। बेमौसम बारिश के बाद उत्पन्न हुई अव्यवस्थाओं का संज्ञान लेते हुए डीएम ने स्वयं मैदान में उतरकर विरासत गलियारा क्षेत्र का सघन निरीक्षण किया। पाण्डेय हाता से धर्मशाला तक पैदल भ्रमण के दौरान उन्होंने न केवल तकनीकी कमियों को पकड़ा, बल्कि स्थानीय व्यापारियों से सीधे संवाद कर प्रशासन की जवाबदेही तय की।ड्रेनेज और तकनीकी खामियों पर जताई नाराजगी निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने जल निकासी की लचर व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों को दो-टूक शब्दों में निर्देश दिया कि गलियों और मुख्य मार्गों की नालियों का जलस्तर तकनीकी रूप से संतुलित होना चाहिए। डीएम ने स्पष्ट कहा कि मुख्य सड़कों की नाली ऊंची होने के कारण गलियों में जलभराव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने आवागमन सुगम बनाने हेतु नालों पर तत्काल स्लैब डालने के निर्देश दिए। सुरक्षा और रोशनी के अभाव पर कड़ा रुख विरासत गलियारे में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुलने पर जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों को तत्काल दुरुस्त करने और अंधेरे वाले क्षेत्रों में नई स्ट्रीट लाइटें लगाने का आदेश दिया। डीएम ने कहा कि व्यापारियों और नागरिकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा। अंडरग्राउंड होंगे लटकते बिजली के तार खुले में लटकते बिजली के तारों को ‘मौत का जाल’ बताते हुए जिलाधिकारी ने विद्युत विभाग के अधिकारियों को इन्हें प्राथमिकता के आधार पर अंडरग्राउंड करने की समयबद्ध कार्ययोजना बनाने को कहा। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि विभागीय समन्वय की कमी या कार्य में देरी होने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मौके पर रही अधिकारियों की फौज निरीक्षण के दौरान एडीएम सिटी अंजनी कुमार सिंह, अपर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा, सिटी मजिस्ट्रेट उत्कर्ष श्रीवास्तव सहित पीडब्ल्यूडी, जलकल और विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जिलाधिकारी के इस तेवर से विभाग में हड़कंप की स्थिति बनी रही।















