- गलत प्रविष्टियों से कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित, सेवानिवृत्ति के 11 महीने बाद भी भटक रहे कर्मी,*
*संवाददाता- जाकिर अली*
गोरखपुर। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का एक प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष रूपेश श्रीवास्तव के नेतृत्व में जिलाधिकारी से मिला और लोक निर्माण विभाग (PWD) सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की गंभीर समस्याओं से जुड़ा एक ज्ञापन सौंपा। जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में अपर जिलाधिकारी (एडीएम) वैभव शर्मा को कर्मचारियों की समस्याओं से विस्तार से अवगत कराया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम को बताया कि लोक निर्माण विभाग सहित कई सरकारी विभागों के लगभग 300 कर्मचारियों का डेटा मानव संपदा पोर्टल पर त्रुटिपूर्ण (गलत) दर्ज है। कई कर्मचारियों की जन्मतिथि गलत अंकित हो चुकी है, तो अधिकांश कर्मियों के अर्जित अवकाश (Earned Leave) रिकॉर्ड में कम दिखाए गए हैं। इस तकनीकी लापरवाही के कारण कर्मचारियों में भारी असंतोष है और सेवानिवृत्ति के समय उन्हें गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सेवानिवृत्ति के 11 महीने बाद भी चक्कर काट रहे अदालत प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से लोक निर्माण विभाग (निर्माण खण्ड-3) का मामला उठाया, जहाँ बेलदार के पद से 30 जून 2025 को सेवानिवृत्त हुए कर्मचारी अदालत का मामला अधर में लटका है। मानव संपदा पोर्टल पर उनकी जन्मतिथि गलत रूप से 01 जनवरी 1995 दर्ज कर दी गई है, जबकि सरकारी सेवा पुस्तिका व अन्य आवश्यक पहचान दस्तावेजों में उनकी वास्तविक जन्मतिथि 02 जून 1965 है। इस तकनीकी चूक के कारण उनके समस्त देयकों और एनपीएस (NPS) के भुगतान पर रोक लगी हुई है और वे पिछले 11 महीनों से आर्थिक व मानसिक रूप से परेशान हैं। नाम की स्पेलिंग गलत होने से भुगतान रुका इसी क्रम में सेवानिवृत्त चौकीदार सुभाष पांडे के नाम की स्पेलिंग में त्रुटि होने के कारण उनका भुगतान पिछले दो महीने से अटका हुआ है। वे विभाग और कोषागार (ट्रेजरी) कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। मुख्यमंत्री के निर्देशों की अनदेखी का आरोप परिषद के अध्यक्ष रूपेश श्रीवास्तव ने प्रशासनिक लापरवाही पर चिंता जताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सेवानिवृत्ति के 30 दिनों के भीतर कर्मचारियों के सभी देयकों का भुगतान अनिवार्य रूप से हो जाना चाहिए। इसके बावजूद गोरखपुर में अधिकारी इस संवेदनशील मामले को लेकर गंभीर नहीं हैं। मानव संपदा पोर्टल पर एनएसडीएल (NSDL) व अन्य कर्मचारी विवरणों का व्यापक सत्यापन (वेरिफिकेशन) किया जाए। पोर्टल की सभी तकनीकी त्रुटियों को तत्काल ठीक कर लंबित भुगतानों का निस्तारण हो। अपर जिलाधिकारी वैभव शर्मा ने पूरे मामले को गंभीरता से सुनते हुए प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे जल्द ही संबंधित विभागीय अधिकारियों और कोषागार से वार्ता करेंगे। उन्होंने पीड़ित कर्मचारियों को न्याय दिलाने और सभी लंबित मामलों का त्वरित समाधान कराने का भरोसा दिया। इस दौरान मदन मुरारी शुक्ला, अशोक पांडे, पंडित राम नारायण शुक्ल, अनिल द्विवेदी, अनूप कुमार श्रीवास्तव, इंजीनियर सौरभ श्रीवास्तव, अशोक शर्मा, राजेश मिश्रा, अदालत, सुभाष पांडेय, रामधनी पासवान सहित भारी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे।















