संवाददाता- जाकिर अली
गोरखपुर। विश्व शांति मिशन के तत्वावधान में मासिक कवि गोष्ठी हुमायूँपुर स्थित कार्यालय पर संपन्न हुई जिसके मुख्य अतिथि राम सुधार सिंह सैंथवार थे एवं अध्यक्षता डॉक्टर हनुमान प्रसाद चौबे ने किया। सर्वप्रथम अवधेश शर्मा नंद’ने सरस्वती वंदना पढ़कर गोष्ठी का शुभारंभ किया व अपनी रचना फटी हो साँच की चादर, उसे फिर नंद ओढे़गा सुना कर वाहवाही लूटा उसके बाद बद्रीनाथ विश्वकर्मा सांवरिया ने अपनी रचना ‘हो बुरा वक्त तो अअपने भी नहीं मिलते सुनाया तत्पश्चात अरविंद अकेला ने भोजपुरी रचना जे के तू आपन समझल उ तोहार ना भयिल सुनया और वरिष्ठ कवि डाक्टर सत्यनारायण पथिक ने नमक खाकर किसी का नमक हरामी ना करना पथिक सारी मिठाई फीकी केवल नमक के आगे सुनाया इसके बाद वरिष्ठ कवयित्री प्रेमलता रस बिंदु ने अपनी रचना मैं एक नारी हूं या पहेली इस बंद दरवाजे में सुना कर वाहवाही लूटा इसके बाद संयोजक शम्स गोरखपुरी ने अपनी रचना आओ एक रस्म जमाने में निभाया जाए कैसे दुख दर्द सहना है सिखाया जाए’ सुना कर गोष्ठी को ऊँचाई प्रदान किया मकबूल अहमद मंसूरी, ने शानदार ग़ज़ल सुनाया दिलों में नफरत की ज्वाला जल रही है, मोहब्बत की दुनिया फना हो रही है। मुख्य अतिथि राम सुधार सिंह सैंथवार, ने भोजपुरी रचना ई जिंदगी ह खेल तमाशा, वो ही के संघरी जिनगी आशा सुना कर भोजपुरी का प्रतिनिधित्व किया और अंत में अध्यक्षता कर रहे डॉक्टर हनुमान प्रसाद चौबे ने तंबाकू निषेध दिवस पर अपनी बात रखते हुए तंबाकू पर अपनी रचना प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी तत्पश्चात वरिष्ठ शायर स्वर्गीय बशीर बद्र को श्रद्धांजलि देते हुए 2 मिनट का मौन रखा गया। संयोजक अरुण श्रीवास्तव ने सभी के प्रति आभार जताया, गोष्ठी का संचालन अरविंद यादव, अकेला ने किया ।















