अभिनंदन मोर्चा
संवाददाता: मोहम्मद कमर
लखीमपुर खीरी। थाना क्षेत्र के ग्रामीण पुरवा गांव निवासी शिबू ने स्थानीय वनरक्षक मतीन पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित का कहना है कि उसके साथ ऐसा व्यवहार किया गया जिससे उसे मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और ग्रामीणों के बीच भी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। पीड़ित शिबू ने मीडिया के सामने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि वह लंबे समय से अपने परिवार के साथ गांव में रहकर मजदूरी और खेती-किसानी के सहारे जीवन यापन कर रहा है। उसके अनुसार हाल ही में उसका वन विभाग के एक कर्मचारी, वनरक्षक मतीन, से विवाद हो गया था। शिबू का आरोप है कि विवाद के बाद वनरक्षक द्वारा उसके साथ अनुचित व्यवहार किया गया और उसे अनावश्यक रूप से परेशान किया गया।
शिबू ने बताया कि उसने कई बार अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। उसका कहना है कि वह एक साधारण ग्रामीण है और सरकारी तंत्र के सामने खुद को असहाय महसूस कर रहा है। पीड़ित के अनुसार यदि समय रहते उसकी बात सुनी जाती तो मामला इतना नहीं बढ़ता। मीडिया से बातचीत के दौरान शिबू भावुक भी नजर आया। उसने कहा कि वह केवल निष्पक्ष जांच चाहता है ताकि सच्चाई सामने आ सके। उसका आरोप है कि उसे डर और दबाव के माहौल में रखा गया तथा उसकी समस्याओं को नजरअंदाज किया गया। शिबू ने जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। घटना की जानकारी मिलने के बाद कुछ ग्रामीण भी पीड़ित के समर्थन में सामने आए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी पर इस प्रकार के आरोप लग रहे हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उनका मानना है कि जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो और तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाए। दूसरी ओर, आरोपों को लेकर वन विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। समाचार लिखे जाने तक वनरक्षक मतीन का पक्ष सामने नहीं आ सका था। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि लिखित शिकायत प्राप्त होती है तो नियमानुसार जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों और आम जनता के बीच बेहतर संवाद होना चाहिए ताकि छोटे विवाद बड़े विवादों का रूप न लें। उनका मानना है कि किसी भी शिकायत को गंभीरता से सुनना और उसका समयबद्ध समाधान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इससे लोगों का भरोसा भी बना रहता है और अनावश्यक विवादों से बचा जा सकता है। कानूनी जानकारों के अनुसार किसी भी व्यक्ति द्वारा लगाए गए आरोप तब तक केवल आरोप माने जाते हैं जब तक उनकी जांच पूरी न हो जाए। इसलिए मामले में निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है।
जांच एजेंसियों को सभी पक्षों की बात सुनकर तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालना चाहिए। फिलहाल ग्रामीण पुरवा गांव का यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। पीड़ित शिबू न्याय की मांग कर रहा है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की मांग तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस प्रकरण में क्या कदम उठाते हैं तथा जांच के बाद सच्चाई क्या सामने आती है।
नोट: यह समाचार पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। सभी पक्षों का मत सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।















