*संवाददाता- जाकिर अली*
गोरखपुर। बढ़ती महंगाई और श्रम कानूनों में बदलाव के विरोध में आज पूरे देश के मजदूरों और कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा। सेन्टर ऑफ इण्डियन ट्रेड यूनियन्स एवं विभिन्न ट्रेड यूनियनों के ‘ऑल इंडिया प्रोटेस्ट डे’ के आह्वान पर उत्तर प्रदेश उत्तराखंड मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन की इकाई ने जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। महंगाई के दौर में ₹26,000 से कम वेतन मंजूर नहीं प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे इकाई अध्यक्ष अखिलेश उपाध्याय ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज के दौर में कमरतोड़ महंगाई ने मजदूर और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है। उन्होंने जोर देकर कहा, वर्तमान न्यूनतम वेतन में सम्मानजनक जीवन जीना असंभव हो गया है। सरकार को अविलंब न्यूनतम वेतन बढ़ाकर ₹26,000 प्रतिमाह करना चाहिए, ताकि एक परिवार अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सके। दमनकारी नीतियों की निंदा संगठन के नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें लगातार मजदूर विरोधी नीतियों को बढ़ावा दे रही हैं। नोएडा, गुरुग्राम और एनसीआर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में शांतिपूर्ण आंदोलनों को बलपूर्वक दबाने की कोशिशों की तीखी निंदा की गई। वक्ताओं ने कहा कि श्रम कानूनों को कमजोर कर कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुँचाया जा रहा है। प्रमुख मांगें जिन पर अड़ा संगठन, न्यूनतम वेतन तत्काल प्रभाव से ₹26,000 प्रतिमाह किया जाए। श्रम कानूनों का सख्ती से पालन हो और ठेका प्रथा पर लगाम लगे। प्रत्येक कर्मचारी के लिए PF और ESI जैसी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
लोकतांत्रिक तरीके से हो रहे मजदूर आंदोलनों पर दमन बंद हो। पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिलेश उपाध्याय एवं संचालन प्रवीण द्विवेदी ने किया। इस दौरान धनंजय श्रीवास्तव, विनय गुप्ता, अभिनव राय, सर्वेश चतुर्वेदी, दीप्तिमान सेन गुप्ता, अमित गुप्ता, संतोष कुमार, उजाला नन्द शुक्ला, राजेश कुमार मिश्रा, वैभव श्रीवास्तव और के के भट्ट सहित भारी संख्या में सदस्य उपस्थित रहे।















